इंद्रधनुष सतरंगा - 2 Mohd Arshad Khan द्वारा प्रेरक कथा में हिंदी पीडीएफ

इंद्रधनुष सतरंगा - 2

Mohd Arshad Khan द्वारा हिंदी प्रेरक कथा

जून की रात थी। हवा ठप थी। गर्मी से हाल-बेहाल हो रहा था। मौलाना रहमत अली दरवाजे़ खडे़ पसीना पोंछ रहे थे। ‘‘ओफ्रफोह! आज की रात तो बड़ी मुश्किल से कटेगी--------’’ ‘‘हाँ, जी सही कहा,’’ पटेल बाबू जाते-जाते खडे़ हो गए, ...और पढ़े