इस कहानी में निन्नी अपनी दादी के जाने के बाद की भावनाओं और यादों को साझा कर रही है। वह सोचती है कि अगर अनुज दा ने उसे समझाया होता, तो शायद वह इस अनजान रास्ते पर आगे बढ़ने से रुक जाती। दादी के बंद दरवाजे से विदा लेते समय निन्नी को दादी की आँखों में आंसू दिखाई देते हैं, जिससे उसे लगता है कि उसने बहुत गलत किया है। निन्नी को लगता है कि दादी ने उसे केवल घर से ही नहीं, बल्कि अपनी ज़िंदगी से भी बेदखल कर दिया। बच्चों के जन्म की ख़बर पर भी दादी ने उसे अपनाने से इनकार कर दिया। वह अपने अतीत में भटकती रहती है, जब सुधा दी उसके पास बैठती हैं और उसे सांत्वना देती हैं। रात के खाने के दौरान, अनुज दा उसकी खुशी के बारे में पूछते हैं, पर निन्नी अपने सच को नहीं बोल पाती। बारह साल बीत जाने पर भी अनुज दा की यादें और उनके प्रति निन्नी का लगाव जस का तस है। वह महसूस करती है कि अनुज दा की मुस्कान में वही पुरानी गर्माहट है, और वह उनकी उपस्थिति को अपने आसपास महसूस करती है। कहानी निन्नी की आंतरिक पीड़ा, रिश्तों की जटिलता और समय के साथ बदलाव को दर्शाती है। उदास क्यों हो निन्नी...? - 2 प्रियंका गुप्ता द्वारा हिंदी सामाजिक कहानियां 7.6k 2.7k Downloads 9k Views Writen by प्रियंका गुप्ता Category सामाजिक कहानियां पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण आज सोचती हूँ, उस दिन अनुज दा मुझे समझाते तो शायद एक अनजान रास्ते पर यूँ बढ़ते मेरे कदम रुक गए होते, पर अनुज दा की ज़बान पर ताला तो खुद मैं ही डाल आई थी न...। घर छोड़ के जाते वक़्त दादी के बन्द दरवाज़े से बैरंग मुड़ जब मैं अनुज दा और सुधा दी से विदा लेने उनके कमरे में गई तो उन्होंने भरी आँखों से बस इतना भर कहा था...बहुत ग़लत किया है तुमने...और फिर पीठ फेर ली थी...। लगा था...कहीं गहरे ढेर सारी किरचें चुभी हुई असहनीय पीड़ा दे रही, पर उस दिन तो मेरे पास उस दर्द के लिए कोई मरहम भी नहीं था। Novels उदास क्यों हो निन्नी...? आज पूरे बारह साल बाद इस कमरे के उस खुले हिस्से पर बैठी हूँ, जिसके लिए बरसों बाद भी कोई सही शब्द नहीं खोज पाई...। कुछ-कुछ छज्जे जैसा, पर छज्जा तो बिलकु... More Likes This सूर्यकुल का सूर्यास्त - 1 द्वारा ALLA NOOR KHAN मुक्त - भाग 13 द्वारा Neeraj Sharma मांई के मांई द्वारा Anant Dhish Aman हंटर - 2 द्वारा Ram Make अंधविश्वास - अंधेरा नहीं, सोच बदलो - 1 द्वारा Kaushik dave टूटता हुआ मन - भाग 1 द्वारा prem chand hembram अदृश्य त्याग अर्द्धांगिनी - 3 द्वारा archana अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी