मनचाहा - 24 V Dhruva द्वारा उपन्यास प्रकरण में हिंदी पीडीएफ

मनचाहा - 24

V Dhruva मातृभारती सत्यापित द्वारा हिंदी उपन्यास प्रकरण

मैं दरवाजा लोक करके मुडी तो साकेत मेरे सामने खड़ा था। मैं- साकेत तुम यहां? साकेत- हां वो तुमसे कुछ बात करनी थी। बुरा न मानो तो तुम्हारे रूम में चले। मैं- अर्जेंट है? साकेत- हां। मैंने रूम का ...और पढ़े