वीर सावरकर की कहानी में उनके तेज, त्याग, तप, तत्व, तर्क, तारुण्य, तीर, तलवार और तिलमिलाहट का उल्लेख किया गया है। 1924 में रिहाई के बाद, सावरकर ने रत्नागिरी में 'रत्नागिरी हिंदू सभा' की स्थापना की और भारतीय संस्कृति और समाज कल्याण के लिए कार्य करने लगे। उन्होंने तिलक की स्वराज पार्टी में शामिल होकर बाद में 'हिंदू महासभा' बनाई और 1937 में इसके अध्यक्ष बने। सावरकर ने हिन्दू एकता को जागृत करने का कार्य किया और दलित हिन्दूओं के मंदिर प्रवेश के लिए पावन मंदिर का निर्माण किया। उन्होंने अपनी कविता "मल्हा देवाचे दर्शन घेवू द्या" के माध्यम से भेदभाव के अन्याय को उजागर किया। हिंदू महासभा ने छूतछात का विरोध किया और अछूतों के मंदिर प्रवेश का समर्थन किया, ताकि उनका धर्मान्तरण रोका जा सके। उन्होंने लिखा कि अगर दलित जातियां अन्य धर्मों को अपनाती हैं, तो हिन्दू अल्पसंख्यक बन जाएंगे। सावरकर पहले देशभक्त लेखक और कवि थे, जिनकी पुस्तकें स्वतंत्रता के कई वर्षों तक प्रतिबंधित रहीं। उन्होंने "हिंदुत्व: who is Hindu..." जैसी किताबें लिखीं, जो हिन्दू विचारधारा को स्पष्ट करती हैं। उन्होंने भारत को पुण्य भूमि बताया और इसे समुद्र से हिमालय तक की भूमि के रूप में परिभाषित किया। देश के बहादुर.. वीर सावरकर - ३ Mewada Hasmukh द्वारा हिंदी प्रेरक कथा 22k 5.7k Downloads 21.5k Views Writen by Mewada Hasmukh Category प्रेरक कथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण सावरकर माने तेज...सावरकर माने त्याग...सावरकर माने तप...सावरकर माने तत्व...सावरकर माने तर्क...सावरकर माने तारुण्य...सावरकर माने तीर...सावरकर माने तलवार...सावरकर माने तिलमिलाहट....वीर सावरकर part-३आप सभी का स्वागत ओर धन्यवाद है।वर्ष 1924 में उनको रिहाई मिली मगर रिहाई की शर्तों के अनुसार उनको न तो रत्नागिरी से बाहर जाने की अनुमति थी और न ही वह कुछ साल तक कोई राजनीति कार्य कर सकते थे।इसीलिए रिहा होने के बाद उन्होंने 23 जनवरी 1924 को ̔रत्नागिरी हिंदू सभा’ का गठन किया और भारतीय संस्कृति और समाज कल्याण के लिए काम करना शुरू किया। थोड़े समय बाद सावरकर तिलक की स्वराज पार्टी में शामिल हो गए Novels देश के बहादुर..वीर सावरकर लिख रहा हूं मै अंजाम,जिसका कल आगाज आएगा...मेरे लहू का हर एक कतरा,इन्कलाब लाएगा...में रहूं या न रहूं पर,ये वादा हे मेरा तुझसे...मेरे बाद वतन पर....मरने... More Likes This असंभव को संभव बनाने वाले: गॉगिन्स की कहानी - 1 द्वारा Nimesh Gavit नम आँखे - 2 द्वारा Nandini Agarwal Apne Kalam Sein आजादी - 1 द्वारा Kuldeep singh सादगी के स्वर : लेखिका गीता कुमारी - 2 द्वारा Geeta Kumari ट्रिपलेट्स भाग 2 द्वारा Raj Phulware जहाँ से खुद को पाया - 1 द्वारा vikram kori 8:30 pm शांति एक्सप्रेस - 1 द्वारा Bhumika Gadhvi अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी