कहानी "हिवड़ो अगन संजोय" में एक खूबसूरत महिला गुलाबो का वर्णन है, जो अपने आकर्षण से चारों ओर के पुरुषों के दिलों को छू लेती है। कहानी की शुरुआत में गुलाबो एक दुकान के कोने से गुजरती है, और उसके हर कदम के नीचे कई पुरुषों के दिल बिछे होते हैं। ये दिल गुलाबो की सुंदरता और उसकी लचकती चाल के प्रति उनकी दीवानगी का प्रतीक हैं। गुलाबो के कदमों के नीचे दुलीराम, हरिया और रामसरन जैसे पुरुषों के दिल हैं, जो उसकी ओर देखते हुए अपने काम में ध्यान नहीं दे पाते। उनकी उपस्थिति से चौराहे पर हलचल बढ़ जाती है, और यह साबित होता है कि उसकी सुंदरता के सामने सभी की दुनिया थम जाती है। गुलाबो की तुलना एक कला के शाहकार से की गई है, जो हर अंग में पूर्णता दर्शाती है। उसकी चाल ऐसी है जैसे शांत जल में लहर उठती हो। कहानी में यह भी दिखाया गया है कि उसके आकर्षण के कारण लोग उसके कदमों में अपने दिल खो देते हैं, लेकिन किसी को भी उसकी सुंदरता के सामने अपनी स्थिति का ध्यान नहीं रहता। इस प्रकार, गुलाबो न केवल एक खूबसूरत महिला है, बल्कि वह अपने चारों ओर की दुनिया को भी प्रभावित करती है। हिवड़ो अगन संजोय Anju Sharma द्वारा हिंदी लघुकथा 9k 2.1k Downloads 6.9k Views Writen by Anju Sharma Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण ऐ तवा ल्यो, कड़ाही ल्यो, चिमटा ल्यो, दरांत ल्यो .... बलखाती हुई आवाज़ के साथ वह लचककर मूलिया दर्जी की दुकान के नुक्कड़ से घूमी तो चौराहे पर मौजूद नज़रें उसी दिशा में उठ गईं! हर कदम के नीचे एक दिल बिछा हुआ था। ये पहले कदम पर किराने वाले दुलीराम का दिल जो रामोतार की बोतल में कड़वा तेल डालते हुए भूल गया देखना कि तेल बोतल में जा रहा है या जमीन पर। और दूसरे कदम पर ये दूधवाले हरिया का दिल कि उसकी एक मुस्कान की चोट से बहका और साइकिल भिड़ा दी, धूप में सुस्ता रही डोकरी की खाट से। अगले कदम के नीचे दिल बिछा था रामसरन धोबी का, जो कपड़े फैलाना छोड़ दिल पर हाथ रखकर बैठ गया। अब बिछे हुए दिलों की गिनती कुछ और आगे बढ़ती अगर रामू चाचा, डोकरी और मनसा धोबन की गालियां एकम-एक न हो गई होतीं। More Likes This प्रेरणास्पंदन - 2-3 द्वारा Bhupendra Kuldeep मंजिले - भाग 46 द्वारा Neeraj Sharma हमको ओढ़ावे चदरिया अब चलती बिरया द्वारा Devendra Kumar डायरी का वो आखरी पन्ना - 4 द्वारा Std Maurya कहानी में छुपी एक सन्देश - 1 द्वारा Std Maurya मेरे समाज में ऐसा क्यों होता हैं - भाग 1 द्वारा Std Maurya ऐसे ही क्यों होता हैं? - 1 द्वारा Std Maurya अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी