कहानी "हवाओं से आगे" में छबीली नाम की एक महिला का वर्णन है, जो पीपल की छाँव में बैठकर अपने आभूषण बेचने का काम करती है। वह सीप, मोती और कौड़ियों से बने आभूषण बनाती है और उन्हें गांव-गांव जाकर बेचती है। एक दिन, जब गर्मी अधिक थी, वह पहले ही पीपल की छाँव में बैठ गई। वह अपने व्यवसाय के बारे में सोचते हुए खुद से बातें करने लगती है और अपनी बिक्री को लेकर चिंतित होती है। छबीली के मन में जोगिया नाम के एक युवक की याद आती है, जो उसके प्रति आकर्षण महसूस कराती है। वह जोगिया की शरारत भरी आँखों और उसकी मस्ती भरी बातों को याद करती है। जोगिया का उसके जीवन में गहरा प्रभाव है, और वह उसे बहुत पसंद करती है। छबीली अपने रूप को सँवारने लगती है और अपने काजल का उपयोग करती है, जिससे उसकी आत्म-प्रेम और जोगिया के प्रति उसकी भावनाएँ और भी गहरी होती हैं। इस प्रकार, कहानी प्रेम, आत्म-स्वीकृति और जीवन की कठिनाइयों को दर्शाती है। हवाओं से आगे - 4 Rajani Morwal द्वारा हिंदी फिक्शन कहानी 15.3k 3k Downloads 7.7k Views Writen by Rajani Morwal Category फिक्शन कहानी पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण दिन ख़ूब चढ़ आया था, आसमान में सूरज कड़ककर धूप उगल रहा था, छबीली सुस्ताने के बहाने चौपाल के बीचोबीच बूढ़े हो आए पीपल की छाँव में आ बैठी थी वह सीप, मोती और कौड़ियों के आभूषण बनाती है और आस-पास के गांवों और कस्बों में घूम-घूमकर उन्हें बेचती है, साथ ही वह रंग-बिरंगी काँच की चूड़ियाँ और शृंगार का अन्य सामान भी रख लेती है, औरतों को खूब सुहाता है यह रंग-बिरंगे समान से भरा टोकरा “चूड़ी लो...बिंदी लो...काजल लो... माला लो... आओ-आओ छबीली आई ताबीज़ भी लाई” जब भी वह टेर लगाती है तो औरतें उसे घेरकर खड़ी हो जाती है, छबीली का बापू टोना-टोटका भी जानता है सो छबीली इन औरतों को अपने-अपने मर्दों को वश में करने का नुस्खे वाला वशीकरण मंत्र फूँका ताबीज़ भी बेच जाती है Novels हवाओं से आगे “जाना है... जाने दो हमें... छोरो, न... चल परे हट लरके ! ए दरोगा बाबू सुनत रहे हो !” “क्या चूँ-चपड़ लगा रखी है तुम लोगों ने ?” दारोगा ज़रा नाराज़ लहज़े मे... More Likes This Oyy Mr. Vampire - 1 द्वारा kusum kumari बारह बरश का इंतज़ार - 2 द्वारा kusum kumari Second Chance - 1 द्वारा wang pang माई डियर प्रोफेसर - भाग 21 द्वारा Vartika reena The Billionaire Werewolf's Obsession - 1 द्वारा Sipra Mohanty मेरा बच्चा... लौटा दो... द्वारा Wajid Husain प्रेम शाश्वतं, मृत्यु शाश्वतः - प्रलोग द्वारा Vartika reena अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी