"अपनी अपनी मरीचिका" भगवान अटलानी द्वारा लिखा गया एक उपन्यास है, जो राजस्थान साहित्य अकादमी के मीरा पुरस्कार से सम्मानित है। कहानी 3 फरवरी, 1952 को शुरू होती है, जब अम्मा एक सप्ताह के बाद घर लौटती हैं। अम्मा ने अपने परिवार की मदद के लिए काका भोजामल के घर में मीनू के विवाह की तैयारियों में भाग लिया, जिसमें रस्में, खरीदारी और अन्य काम शामिल थे। काकी यह महसूस करती थीं कि अम्मा की मदद के बिना वह किसी काम को सही तरीके से नहीं कर पाएंगी, भले ही उन्होंने पहले भी दो शादियाँ की हों। अम्मा की शादी-ब्याह के मामलों में गहरी जानकारी और अनुभव है, जिससे दूर-दूर से महिलाएँ सलाह लेने आती हैं। अम्मा की सलाह को सभी मानते हैं और विवाद होने पर उसकी राय को आधार बनाकर समस्याएँ सुलझा ली जाती हैं। मीनू का विवाह जयपुर में हुआ है, और उसकी उम्र केवल सत्रह वर्ष है। पुराने परंपराओं के अनुसार, इस उम्र में शादी करना सामान्य था। काका भोजामल मीनू के साथ ही उसके भाई वीरू का विवाह करने की इच्छा रखते थे, लेकिन रिश्ता नहीं बन सका। कहानी में पारिवारिक संबंधों, सामाजिक परंपराओं और विवाह की रस्मों का गहराई से वर्णन किया गया है। अपनी अपनी मरीचिका - 9 Bhagwan Atlani द्वारा हिंदी फिक्शन कहानी 3.8k 3.7k Downloads 9.7k Views Writen by Bhagwan Atlani Category फिक्शन कहानी पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण एक सप्ताह के बाद अम्मा आज घर आई है। घर की सफाई, झाड़-फूँक मैं करता था। बाबा और मैं भोजन के लिए काका भोजामल के धर जाते थे। उनके घर में स्थानाभाव है इसलिए रात को अपने घर आकर सोते थे। अम्मा पूरा समय काका भोजामल के घर रहती थी। 31 जनवरी को मीनू का विवाह था। विवाह से तीन दिन पहले रस्में शुरू हो गई थीं। अम्मा का दिन के समय काकी की मदद के लिए उनके घर जाना तो एक महीना पहले ही शुरू हो गया था। Novels अपनी अपनी मरीचिका शायद ही कोई ऐसा धंधा करने वाला दुकानदार होगा जिसे लोग कई नामों से पुकारते हों। उसे हेय दृष्टि से देखते हों। नाम सुनकर मुँह बिचका देते हों। लेकिन मेरे... More Likes This Oyy Mr. Vampire - 1 द्वारा kusum kumari बारह बरश का इंतज़ार - 2 द्वारा kusum kumari Second Chance - 1 द्वारा wang pang माई डियर प्रोफेसर - भाग 21 द्वारा Vartika reena The Billionaire Werewolf's Obsession - 1 द्वारा Sipra Mohanty मेरा बच्चा... लौटा दो... द्वारा Wajid Husain प्रेम शाश्वतं, मृत्यु शाश्वतः - प्रलोग द्वारा Vartika reena अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी