यह कहानी एक युवती, सलमा, के बारे में है जो बस स्टैंड पर खड़ी है और ए रूट वाली बस का इंतज़ार कर रही है। वह खुद को असुरक्षित महसूस करती है, क्योंकि उसके पास कुछ पुरुष मौजूद हैं, जिनमें से एक उसे घूर रहा है। उसकी उम्र लगभग 20-22 साल है, और वह बहुत घबरा रही है। सलमा की एक नई सहेली है, शाहिदा, जिसके साथ वह हाल ही में मिली है। शाहिदा ने सलमा को अपने घर बुलाया और वे दो घंटे तक बातें करती हैं। शाहिदा यह सुझाव देती है कि सलमा को शादी कर लेनी चाहिए, लेकिन सलमा इस विचार को नकारती है और कहती है कि वह कुंवारी रहना चाहती है। शाहिदा इस पर हंसते हुए कहती है कि शादी के बाद जीवन की खुशियाँ और लुत्फ़ सामने आते हैं। वह सलमा को समझाती है कि मर्द और औरत का रिश्ता प्राकृतिक है और बिना मर्द के जीना मुश्किल होगा। सलमा इसका विरोध करती है और कहती है कि यदि वह पागल हो जाए तो भी कोई बात नहीं है, क्योंकि कई लोग इस दुनिया में पागल हैं और जी रहे हैं। कहानी इस बात पर केंद्रित है कि समाज में विवाह और रिश्तों के प्रति अलग-अलग दृष्टिकोण कैसे होते हैं। बस स्टैंड Saadat Hasan Manto द्वारा हिंदी लघुकथा 58.5k 6.9k Downloads 20.1k Views Writen by Saadat Hasan Manto Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण वो बस स्टैंड के पास खड़ी ए रूट वाली बस का इंतिज़ार कर रही थी उस के पास कई मर्द खड़े थे उन में एक उसे बहुत बुरी तरह घूर रहा था उस को ऐसा महसूस हुआ कि ये शख़्स बर्मे से इस के दिल-ओ-दिमाग़ में छेद बना रहा है। उस की उम्र यही बीस बाईस बरस की होगी लेकिन इस पुख़्ता साली के बावजूद वो बहुत घबरा रही थी जाड़ों के दिन थे पर इस के बावजूद इस ने कई मर्तबा अपनी पेशानी से पसीना पोंछा उस की समझ में नहीं आता था क्या करे बस स्टैंड से चली जाये कोई ताँगा ले ले या वापस अपनी सहेली के पास चली जाये। Novels मंटो की बदनाम कहानियाँ - पार्ट २ लाहौर से बाबू हरगोपाल आए तो हामिद घर का रहा ना घाट का। उन्हों ने आते ही हामिद से कहा। “लो भई फ़ौरन एक टैक्सी का बंद-ओ-बस्त करो।” हामिद ने कहा। “आप ज़रा... More Likes This चुन्नू और मुन्नू - एक खट्टी-मीठी दोस्ती ( भाग -1) द्वारा Vishakha Pareek जग्गू - द डिटैक्टिव - 1 द्वारा Rakesh Kumar Sharma आज्ञा द्वारा Rajeev kumar पता बताते दिन द्वारा महेश रौतेला तुम हो तो सब कुछ है - भाग 1 द्वारा Ankit Khatri मेरी जिंदगी का सफर 1 द्वारा Ankit Khatri अहमदाबाद के चर्चे द्वारा Devendra Kumar अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी