कहानी "अपनी अपनी मरीचिका" में, 6 सितम्बर 1951 को छात्रसंघ के चुनावों के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण घटना का वर्णन है। पहली बार, प्रथम वर्ष के छात्रों को चुनाव लड़ने का अवसर मिला है, जबकि पिछले वर्ष रैगिंग के मुद्दे पर उन्होंने चुनावों का बहिष्कार किया था। चुनाव लड़ने वाले वरिष्ठ छात्रों ने नए छात्रों को मतदान के लिए मनाने की कोशिश की, परंतु नए छात्रों की शर्त थी कि रैगिंग के मुद्दे पर उनका समर्थन किया जाए। चुनाव में रैगिंग का मुद्दा चर्चा का विषय नहीं बना, और अंततः नए छात्रों ने मतदान में भाग नहीं लिया। उनका यह बहिष्कार छात्रसंघ या प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण नहीं समझा गया। कहानी इस बात को उजागर करती है कि कैसे छोटे-छोटे मुद्दे भी बड़े चुनावों में बिना चर्चा के रह जाते हैं, और किस तरह से छात्रों की एकता और बहिष्कार के बावजूद उनका प्रभाव सीमित होता है। अपनी अपनी मरीचिका - 8 Bhagwan Atlani द्वारा हिंदी फिक्शन कहानी 5.9k 3k Downloads 7.9k Views Writen by Bhagwan Atlani Category फिक्शन कहानी पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण छात्रसंघ के विभिन्न पदों पर चुनाव के लिए आवेदन-पत्र जमा कराने की आज अंतिम तारीख थी। नियमानुसार प्रथम वर्ष के छात्र मतदान तो कर सकते हैं किंतु चुनाव नहीं लड़ सकते। इस दृष्टि से हमारी कक्षा को चुनाव लड़़ने का अवसर पहली बार मिला है। गत वर्ष रैगिंग के मुद्दे को लेकर हम लोगों ने चुनावों का बहिष्कार किया था। चुनाव लड़़नेवाले 3 वरिष्ठ छात्रों ने अप्रत्यक्ष रूप से संदेश भेजकर हम लोगों को मतदान करने के लिए राजी करने की कोशिश की थी। हमारा जवाब एक ही था, रैगिंग के मुद्दे पर हमारा समर्थन करने की घोषणा करो। नए छात्रों के सभी मत तुम्हें और तुम्हारे प्रत्याशियों को मिलेंगे। Novels अपनी अपनी मरीचिका शायद ही कोई ऐसा धंधा करने वाला दुकानदार होगा जिसे लोग कई नामों से पुकारते हों। उसे हेय दृष्टि से देखते हों। नाम सुनकर मुँह बिचका देते हों। लेकिन मेरे... More Likes This RAJPUTANA - The War of Love and Revenge - 1 द्वारा Aarushi Singh Rajput पहला प्यार ? - 2 द्वारा Alone Soul सुनहरा फलक - 1 द्वारा Digvijay Singh Rathore खलनायिका के रूप में पुनर्जन्म - 1 द्वारा Fictional world THE UNTOLD CHAPTER - 1 द्वारा Neha Banchhor कुरिवाज की केद से सपनों की उड़ान तक - 1 द्वारा miss k त्रिवेणी: एक आदर्श बहू से बेकार बहू बनने तक का सफर - 1 द्वारा Triveni chakrdhari अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी