फ़रिश्ता Saadat Hasan Manto द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

फ़रिश्ता

Saadat Hasan Manto मातृभारती सत्यापित द्वारा हिंदी लघुकथा

सुर्ख़ खुरदरे कम्बल में अताउल्लाह ने बड़ी मुश्किल से करवट बदली और अपनी मुंदी हुई आँखें आहिस्ता आहिस्ता खोलीं। कुहरे की दबीज़ चादर में कई चीज़ें लिपटी हुई थीं जिन के सही ख़द्द-ओ-ख़ाल नज़र नहीं आते थे। एक लंबा, ...और पढ़े

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