मैं... Harshad Molishree द्वारा पत्रिका में हिंदी पीडीएफ

मैं...

Harshad Molishree द्वारा हिंदी पत्रिका

इंसानियत की बस्ती जल रही थी, चारों तरफ आग लगी थी... जहा तक नजर जाती थी, सिर्फ खून में सनी लाशें दिख रही थी, लोग जो जिंदा थे वो खौफ मै यहा से वहां भाग रहे थे, काले रास्तों ...और पढ़े