यह कहानी "बाऊजी की बनियान" एक बेटे की नजर से बाऊजी (पिता) की स्थिति और उनके पुराने कपड़ों के प्रति भावनाओं को दर्शाती है। कहानी में बाऊजी की सफेद बनियान का जिक्र है, जो समय के साथ फीकी और ढीली हो गई है। यह बाऊजी की चिंताओं और उनकी गरीब परिस्थितियों का प्रतीक है। बेटे का बाऊजी के प्रति आदर और चिंता स्पष्ट है, लेकिन वह यह भी महसूस करता है कि बाऊजी अपनी सेहत और कपड़ों की परवाह नहीं करते। बेटा अपने अच्छे कपड़ों और जूते के बारे में सोचता है और यह महसूस करता है कि बाऊजी को नए कपड़े खरीदने की आवश्यकता है। वह अपने भविष्य के सपनों के बारे में सोचता है, जिसमें वह बड़ा होकर बाऊजी का ख्याल रखेगा और उन्हें नई चीजें देगा। कहानी में दीदी की शादी का जिक्र भी है, जिसके लिए बेटा दोस्तों को बुलाने की योजना बनाता है। कहानी में बाऊजी की बदलती सेहत का भी जिक्र है, जो बेटे के मन में चिंता पैदा करता है। बेटा चाहता है कि सब कुछ पहले जैसा हो जाए और वह बाऊजी को जवान देख सके। वह अपने दोस्तों के सामने बाऊजी का मजाक उड़ाए जाने पर गुस्सा होता है, जो उसकी भावनाओं को व्यक्त करता है। अंत में, घर में नए पर्दे और सामान लाने की योजना बनाई जाती है, जो एक नई शुरुआत का संकेत देती है। कहानी में परिवार, प्यार, चिंता और सामाजिक स्थिति के मुद्दों को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया है। बाऊजी की बनियान Surya Rawat द्वारा हिंदी प्रेरक कथा 1.4k 1.8k Downloads 8k Views Writen by Surya Rawat Category प्रेरक कथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण ☆ बाऊजी की बनियान ☆बाऊजी की सफेद बनियान, जिसे दो साल पहले माँजी मेले से खरीद लाई थी । वह जब नई थी तो उजली सफेद और फिट थी पिताजी की बाहों पर फिट बैठती थी लेकिन अब वह सीने और बाहों से लटक गई है । उसका रंग कहीं उड़ गया है शायद घर की चिंता में ..... नही घर की चिंता में क्यों ? कहीं ज्य़ादा धुलने से उड़ गया होगा । मेरी बहन पिताजी कहती है, लेकिन मेरे मुँह से बाऊजी ही निकलता है । बाऊजी की बनियान में बहुत से छेद हैं ... सीने के सफेद बाल बाहर झांकते हैं ... लेकिन हम More Likes This नम आँखे - 2 द्वारा Nandini Agarwal Apne Kalam Sein आजादी - 1 द्वारा Kuldeep singh सादगी के स्वर : लेखिका गीता कुमारी - 2 द्वारा Geeta Kumari ट्रिपलेट्स भाग 2 द्वारा Raj Phulware जहाँ से खुद को पाया - 1 द्वारा vikram kori 8:30 pm शांति एक्सप्रेस - 1 द्वारा Bhumika Gadhvi स्वयं पर नज़र: जीवन को समझने का असली मार्ग - 1 द्वारा Sweta Pandey अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी