इस कहानी में लेखक बाबू गोपी नाथ और अपने दोस्त सादिक़ की तुलना करते हैं। वह सोचते हैं कि बाबू गोपी नाथ की शख्सियत अजीब है, और उसे सादिक़ से मिलते-जुलते गुणों वाला मानते हैं। बाबू गोपी नाथ को धन विरासत में मिला है, जबकि सादिक़ ने अपनी मेहनत से कमाया है। दोनों ही में खर्च करने की प्रवृत्ति है, लेकिन दोनों की सोच और रुचियां अलग हैं। लेखक सादिक़ की ईमानदारी और मेहनती स्वभाव को सराहते हैं, जबकि बाबू गोपी नाथ को लूटने और भौतिकता में रुचि है। लेखक यह मानते हैं कि दोनों की मानसिकता एक समान है और उनका ख्याल है कि सादिक़ को भी बाबू गोपी नाथ की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। कहानी में यह भी बताया गया है कि सादिक़ ने दिल्ली में ठेकेदारी के दौरान काफी दौलत कमाई, बावजूद इसके कि उसने सरकारी धन का गलत तरीके से उपयोग किया। लेखक इस बात को उजागर करते हैं कि दोनों की जिंदगी में समानता है, लेकिन उनके चरित्र में अंतर है। नुत्फ़ा Saadat Hasan Manto द्वारा हिंदी लघुकथा 16.8k 6.3k Downloads 14.8k Views Writen by Saadat Hasan Manto Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण मालूम नहीं बाबू गोपी नाथ की शख़्सियत दर-हक़ीक़त ऐसी ही थी जैसी आप ने अफ़्साने में पेश की है, या महज़ आप के दिमाग़ की पैदावार है, पर मैं इतना जानता हूँ कि ऐसे अजीब-ओ-ग़रीब आदमी आम मिलते हैं....... मैं ने जब आप का अफ़्साना पढ़ा तो मेरा दिमाग़ फ़ौरन ही अपने एक दोस्त की तरफ़ मुंतक़िल हो गया.......सादिक़े की तरफ़....... आप के बाबू गोपी नाथ और उस में बज़ाहिर कोई मुमासिलत नहीं है....... लेकिन मैं ऐसा महसूस करता हूँ कि उन दोनों का ख़मीर एक ही मिट्टी से उठा है....... आप के बाबू गोपी नाथ को दौलत विरासत में मिली है। मेरे सादिक़े को अपनी मेहनत-ओ-मशक़्क़त और ज़हानत के सिले में। दोनों शाह ख़र्च थे। आप का बाबू गोपी नाथ बज़ाहिर बुद्धू था। लेकिन दर-अस्ल बहुत होशियार और बाख़बर आदमी था। Novels मंटो की दिलचस्प कहानियाँ मैं आज आप को चंद शिकारी औरतों के क़िस्से सुनाऊंगा। मेरा ख़याल है कि आप को भी कभी उन से वास्ता पड़ा होगा। मैं बंबई में था। फिल्मिस्तान से आम तौर पर बर्... More Likes This किराए का घर द्वारा Vandna Sharma First Love - 1 द्वारा Sah Ankita जिस जीवन में तुम थे - 2 द्वारा SHREYA INDUSHREE तुम्हें भी तो याद आती होगी - 1 द्वारा Anil Kundal मेरा साहित्य लेखन द्वारा Rakesh Kumar Sharma अलविदा आनंद! द्वारा Devendra Kumar आग और ठहराव - 1 द्वारा Alka rahul Aggarwal अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी