यह कहानी "लौट आओ दीपशिखा" पर आधारित है, जिसमें मुख्य पात्र शेफ़ाली है, जो अपनी बचपन की दोस्त दीपशिखा के बारे में सोचती है। कहानी का प्रारंभ एक सुंदर लेकिन सुनसान बंगले 'गौतम शिखा कुटीर' से होता है, जिसे शेफ़ाली अच्छी तरह जानती है। बंगले पर सरकारी ताले लटक रहे हैं, जिससे शेफ़ाली का मन बहुत उदास और परेशान हो जाता है। एक सुबह, शेफ़ाली को फोन आता है, जिसमें उसे बताया जाता है कि दीपशिखा अब इस दुनिया में नहीं रही। यह खबर शेफ़ाली के लिए बेहद दर्दनाक होती है। वह अपने परिवार की जिम्मेदारियों में व्यस्त है, लेकिन दीपशिखा की यादों और उसकी मृत्यु के कारण वह गहरे दुख में डूब जाती है। कहानी में गहरी भावनाओं और रिश्तों की जटिलता को दर्शाया गया है, जिससे पता चलता है कि जीवन में कभी-कभी अनपेक्षित घटनाएँ कितनी दुखदायी हो सकती हैं। लौट आओ दीपशिखा - 1 Santosh Srivastav द्वारा हिंदी फिक्शन कहानी 77.9k 10.2k Downloads 19.7k Views Writen by Santosh Srivastav Category फिक्शन कहानी पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण गुलमोहर के साये में स्थित वह खूबसूरत बंगला जो ‘गौतम शिखा कुटीर’ के नाम से मशहूर था और जो कभी रौनक से लबरेज़ हुआ करता था आज सन्नाटे की गिरफ़्त में है और उसके भीतरी दरवाज़े और काले स्टील के कंगूरेदार गेट पर सरकारी ताले लटक रहे हैं शेफ़ाली कितनी बार इस गेट से पार हुई है बंगले का कोना-कोना उसका परिचित है और उसकी मालकिन मशहूर चित्रकार उसकी बचपन की दोस्त दीपशिखा..... उसकीहर अदा, हर ख़ासो आम बात की राज़दार है वह ज़िन्दग़ी का ये हश्र होगा सोचा न था ये सरकारी ताले उसके दिमाग़ में अंधड़ मचा रहे हैं वह तहस-नहस हो जाती है उसकी नींदें दूर छिटक जाती हैं और चैन हवा हो जाता है क्याइंसान इतना बेबस-लाचार है? क्या वो सबके होते हुए भी लावारिस और तनहा है? Novels लौट आओ दीपशिखा गुलमोहर के साये में स्थित वह खूबसूरत बंगला जो ‘गौतम शिखा कुटीर’ के नाम से मशहूर था और जो कभी रौनक से लबरेज़ हुआ करता था आज सन्नाटे की गिरफ़्त में है और... More Likes This Oyy Mr. Vampire - 1 द्वारा kusum kumari बारह बरश का इंतज़ार - 2 द्वारा kusum kumari Second Chance - 1 द्वारा wang pang माई डियर प्रोफेसर - भाग 21 द्वारा Vartika reena The Billionaire Werewolf's Obsession - 1 द्वारा Sipra Mohanty मेरा बच्चा... लौटा दो... द्वारा Wajid Husain प्रेम शाश्वतं, मृत्यु शाश्वतः - प्रलोग द्वारा Vartika reena अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी