स्वाभिमान - लघुकथा - 49 VIRENDER VEER MEHTA द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

स्वाभिमान - लघुकथा - 49

VIRENDER VEER MEHTA मातृभारती सत्यापित द्वारा हिंदी लघुकथा

'इस समय कौन आ सकता है?' डोर-बेल की आवाज पर सोचते हुए निशि ने दरवाजा खोला, सामने रवि था। वर्षों बाद पति को देख वह समझ नही सकी कि वह क्या करे? खामोशी से रास्ता देते हुए अंदर आ ...और पढ़े


अन्य रसप्रद विकल्प