इस कहानी में एक संवाद है जिसमें एक व्यक्ति अपनी आंटी से बात कर रहा है। वह कहता है कि वे कल से केवल बर्तन धोने का काम करेंगे और बाकी काम नहीं करेंगे। आंटी इस पर सवाल उठाती हैं कि क्या कोई समस्या है, और उसे बर्तनों को धोने में कोई दिक्कत तो नहीं है। यह संवाद एक सरल घरेलू स्थिति को दर्शाता है, जिसमें कार्यों को लेकर बातचीत होती है। स्वाभिमान - लघुकथा - 36 Sangeeta Gandhi द्वारा हिंदी लघुकथा 4.4k 1.7k Downloads 5.3k Views Writen by Sangeeta Gandhi Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण “ऑन्टी हम कल से सिर्फ बर्तन धोएंगे। रसोई का बाकी काम न करेंगे ।” “ क्यों ,क्या दिक्कत है? तुम्हें बर्तनों के लिए 600 देते हैं। रसोई साफ करने ,सब्जी काटने के अलग से 200 देते हैं न !” “ऑन्टी ,6 नम्बर वाली गली में एक नयी संस्था खुली है। वो हमें पढ़ाएंगे ।बहुत सी लड़कियां -जो स्कूल छोड़ चुकी हैं ,वो सब वहाँ पढ़ने जा रही है। कल से हम भी जाएंगे ।” More Likes This ठुकराईन नयना देवी - 3 द्वारा Vandna Sharma लोकतंत्र की ज़मीनी सच्चाई - 1 द्वारा Std Maurya दिल्ली जिमखाना क्लब द्वारा Devendra Kumar Fake Boyfriend real Feelings - 1 द्वारा Mawaskar Pratigya कॉल - 1 द्वारा sky कुछ बातें मां बाप के दिल की । - 3 द्वारा miss k पढ़ाकू द्वारा Vandna Sharma अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी