प्रभा एक ट्रेन में यात्रा कर रही थी और सुबह की आवाजों से जागी। उसने अपने पति सुधीर से चाय के लिए पूछा और चाय खरीदने के बाद पेपर वाले लड़के को पैसे दिए। लड़का, जो छोटी उम्र का था, ने खुल्ले पैसे नहीं होने की बात कही। प्रभा ने उसे पांच रुपये देने की पेशकश की, लेकिन लड़का नहीं माना और कहा कि वह खुद पैसे लाएगा। कुछ समय बाद, प्रभा ने फैसला किया कि वह और एक पेपर खरीद लेगी, जिससे लड़के की चिंता समाप्त हो गई। लड़का खुशी-खुशी प्लेटफार्म पर उतरकर नाश्ता करने चला गया। इस कहानी में स्वाभिमान, आत्मविश्वास और ईमानदारी की झलक मिलती है, साथ ही यह दिखाता है कि कैसे एक छोटे से निर्णय ने एक बच्चे की दिन को बेहतर बना दिया। स्वाभिमान - लघुकथा - 26 Kapil Shastri द्वारा हिंदी लघुकथा 4.2k 1.4k Downloads 4.2k Views Writen by Kapil Shastri Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण ऐ.सी.थ्री टायर की साइड अपर बर्थ पर उनींदी हो रही प्रभा को आभास था कि कुछ छोटे मोटे स्टेशन्स चुपके से गुजर चुके हैं और अब चाय, गरमागरम चाय, बढ़िया मसाले वाली चाय और पेपर, सुबह का पेपर जैसी आवाजों और इमरजेंसी कॉल पर शौचालय की तरफ भागते यात्रियों से सुनिश्चित था कि सुबह हो चुकी है और कोई बड़ा स्टेशन है। More Likes This हमको ओढ़ावे चदरिया अब चलती बिरया द्वारा Devendra Kumar डायरी का वो आखरी पन्ना - 4 द्वारा Std Maurya कहानी में छुपी एक सन्देश - 1 द्वारा Std Maurya मेरे समाज में ऐसा क्यों होता हैं - भाग 1 द्वारा Std Maurya ऐसे ही क्यों होता हैं? - 1 द्वारा Std Maurya एक डिवोर्स ऐसा भी - 1 द्वारा Alka Aggarwal पहली मुलाक़ात - 1 द्वारा puja अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी