यह कहानी एक चिकित्सा भौतिकीविद और विकिरण सुरक्षा विशेषज्ञ की है, जिसका नाम अरविन्द कुमार तिवारी है। वह जीवन को अच्छे से जी रहा था, लेकिन संविधान के नए व्याख्याकारों की गतिविधियों ने उसे चिंता में डाल दिया। वह अपने दैनिक जीवन में इस बात को लेकर परेशान है कि क्या उसका व्यवहार असंवैधानिक हो सकता है। उसने संविधान के बारे में कुछ पढ़ा है, लेकिन उसे लगता है कि वह उसके बारीक पहलुओं को समझ नहीं पाया है। वह सोचता है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दायरा वास्तव में सीमित है, और यह दूसरों द्वारा निर्धारित किया जाता है। उसे डर है कि उसके सामान्य क्रियाकलाप अचानक किसी द्वारा असंवैधानिक घोषित किए जा सकते हैं। यह कहानी उस व्यक्ति की मानसिक स्थिति और समाज में बढ़ते असुरक्षा के भाव को दर्शाती है। कहीं मैं असंवैधानिक तो नहीं Arvind Kumar द्वारा हिंदी हास्य कथाएं 12.9k 2.2k Downloads 8.2k Views Writen by Arvind Kumar Category हास्य कथाएं पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण मेरा यह व्यंग्य आज के उस माहौल पर सशक्त कटाक्ष है, जहाँ बार-बार संविधान की दुहाई देकर लोगों को बोलने नहीं दिया जाता है, जबकी ऐसा करने वाले संविधान के बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं. यह व्यंग्य निश्चित ही आपको हास्य के साथ-साथ सोचने के लिए भी बाध्य करेगा. More Likes This Rebirth of a Bench - Index द्वारा Amardeep Kumar God Wishar - 3 द्वारा Ram Make Hero - 5 द्वारा Ram Make Potty Robbers and Me - 1 द्वारा BleedingTypewriter रशीली भाभी का जलवा द्वारा Md Siddiqui चेकपोस्ट:चाणक्य - 1 द्वारा Ashish jain मोहल्ले की भव्य शादी - 1 द्वारा manoj अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी