श्वेता अपने पौधों के साथ समय बिता रही थी, ताकि अपने मन की व्याकुलता को कम कर सके। जब वह अंदर आई, तो उसने देखा कि उसका बेटा भास्कर बिस्तर पर लेटा हुआ था, उसकी आँखों में दर्द था। श्वेता ने भास्कर को ढांढस बंधाया और उसे बताया कि वह बहादुर है। भास्कर ने पूछा कि यह सब कब तक चलेगा और क्या वह कभी ठीक होगा, लेकिन श्वेता ने कोई उत्तर नहीं दिया। भास्कर की बीमारी थैलासीमिया थी, जिसके लिए उसे हर पंद्रह दिन में रक्त परिवर्तन की जरूरत थी। श्वेता उसकी देखभाल करती थी, लेकिन उसकी चिंताओं ने उसे रात भर जगाए रखा। उसकी माँ के लिए यह कठिनाई और चिंता का समय था, क्योंकि वह अपने बेटे की बीमारी के खिलाफ संघर्ष कर रही थी। फ्रंट Ashish Kumar Trivedi द्वारा हिंदी लघुकथा 13k 1.6k Downloads 5.1k Views Writen by Ashish Kumar Trivedi Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण यह कहानी एक शहीद मेजर की पत्नी की है। जैसे सेना का सिपाही पूरी मुस्तैदी से सरहद पर डटा रहता है वैसे ही उसकी पत्नी सामाजिक व पारिवारिक फ्रंट पर डटी रहती है। यह पूरी हिम्मत के साथ जीवन संघर्ष को झेलती श्वेता की कहानी है। जिसने पति के शहीद होने पर भी हार नहीं मानी। More Likes This अभिनेता मुन्नन द्वारा Devendra Kumar चुन्नू और मुन्नू - एक खट्टी-मीठी दोस्ती ( भाग -1) द्वारा Vishakha Pareek जग्गू - द डिटैक्टिव - 1 द्वारा Rakesh Kumar Sharma आज्ञा द्वारा Rajeev kumar पता बताते दिन द्वारा महेश रौतेला तुम हो तो सब कुछ है - भाग 1 द्वारा Ankit Khatri मेरी जिंदगी का सफर 1 द्वारा Ankit Khatri अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी