विचित्र चित्र - सिर्फ़ देखूँगा Mukteshwar Singh द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

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विचित्र चित्र - सिर्फ़ देखूँगा

Mukteshwar Singh द्वारा हिंदी कविता

कभी लगता है इस रंगबिरंगी दुनिया में मैं अकेला हूँ,कभी लगता है उन रंगों में घुल गया हूँ,और कई चित्रों में उभर आया हूँ।माँ बाप का सहारा,बंधु बान्धवों का प्यारा,सखा-मित्रों का दुलारा।समय के साथ चित्रों का रंगहो गया बजरंगदोस्त ...और पढ़े


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