यह कहानी एक मुर्गी की है जो अपने पिता के प्रति बचपन से दबे हुए गुस्से और रोष के चलते एक महत्वपूर्ण निर्णय लेने जा रही है। उसके घर का माहौल हमेशा से तनावपूर्ण रहा है, जहां उसके पिता की हिंसा का शिकार उसकी माँ और भाई-बहन होते थे। वह अपने पिता के मूड को देखकर डरती थी और उसे हमेशा अपनी भावनाएँ छिपानी पड़ती थीं। पिता उसे 'गधी' कहकर अपमानित करते थे, जिससे उसे अपने आत्मसम्मान पर चोट लगती थी। अब वह एक देसी मुर्गी होते हुए एक अमेरिकन मुर्गे से शादी करने का निर्णय ले चुकी है, जो उसके परिवार और जात-बिरादरी के खिलाफ है। उसे याद है कि जब पहली बार वह अमेरिकन मुर्गा उनके बाड़े में आया था, तब वह बहुत डरा हुआ था, जबकि सभी देसी मुर्गियाँ उस पर लट्टू थीं। इस कहानी में मुर्गी अपने लिए एक नया जीवन चुनने का साहस दिखा रही है, जो उसके लिए एक बड़ा कदम है। दाल बराबर Neetu Singh Renuka द्वारा हिंदी लघुकथा 4.4k 1.4k Downloads 5.1k Views Writen by Neetu Singh Renuka Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण अगर मुर्गियों की ज़बान होती तो वो कैसे अपनी आत्मकथा बयान करती इस हास्य-व्यंग्य से भरी कहानी में एक मुर्गी अपनी आत्मकथा कह रही है जिसे कहीं-कहीं इंसानों पर भी लागू किया जा सकता है। More Likes This लोकतंत्र की ज़मीनी सच्चाई - 1 द्वारा Std Maurya दिल्ली जिमखाना क्लब द्वारा Devendra Kumar Fake Boyfriend real Feelings - 1 द्वारा Mawaskar Pratigya कॉल - 1 द्वारा sky कुछ बातें मां बाप के दिल की । - 3 द्वारा miss k पढ़ाकू द्वारा Vandna Sharma कोन्निचिवा: माय देसी लव - 1 द्वारा Kajal Soam अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी