यह कहानी डाक्टर सईद के बारे में है, जो लेखक का करीबी दोस्त है। डाक्टर सईद बैंगलौर का निवासी है, लेकिन वह उर्दू भाषा में बहुत अच्छे से बातचीत करता है और उर्दू के प्रसिद्ध शायरों का अध्ययन किया है। लेखक ने डाक्टर सईद से पूछा कि उसने चिकित्सा के पेशे को क्यों चुना, जबकि वह उर्दू और फ़ारसी के अच्छे प्रोफेसर बन सकते थे। डाक्टर सईद ने उत्तर दिया कि चिकित्सा में उसकी आमदनी अच्छी है, और वह प्रतिदिन आराम से एक सौ से सवा सौ रुपये कमा लेता है, जबकि अन्य पेशों में उसे अधिकतम छह या सात सौ रुपये महीने मिलते। इस प्रकार, उसने अपनी आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए चिकित्सा का पेशा चुना।
क़ीमे की बजाय बोटियाँ
Saadat Hasan Manto
द्वारा
हिंदी लघुकथा
Four Stars
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विवरण
डाक्टर सईद मेरा हम-साया था उस का मकान मेरे मकान से ज़्यादा से ज़्यादा दो सौ गज़ के फ़ासले पर होगा। उस की ग्रांऊड फ़्लोर पर उस का मतब था। मैं कभी कभी वहां चला जाता एक दो घंटे की तफ़रीह हो जाती बड़ा बज़्लासंज, अदब शनास और वज़ादार आदमी था।
मंटो अपने ज़माने के बदनाम लेखकों में से एक हैं जिन्हें सरकार और समाज दोनों ही पसंद नहीं करते थे| उसकी वजह थी उनकी सीधी सटीक बातें जो कहानियां कम और सवा...
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