यह कहानी "बेताल पच्चीसी" की है, जिसमें राजा विक्रमादित्य और उनके छोटे भाई भर्तृहरि की कथा है। भर्तृहरि, जो पहले एक शक्तिशाली राजा था, ने अपने राज्य को छोड़कर योगी बनने का निर्णय लिया। एक ब्राह्मण को अमरता का फल मिला, जिसे उसने भर्तृहरि को देने के लिए भेजा। भर्तृहरि ने फल अपनी रानी को दिया, लेकिन यह फल अंततः एक वेश्या के पास पहुंच गया। जब भर्तृहरि को सच्चाई का पता चला, तो उसने फल खा लिया और संसार की माया को समझते हुए तपस्या करने जंगल चला गया। इस बीच, विक्रमादित्य ने अपने भाई के बिना गद्दी संभाली, लेकिन जब देवताओं ने धारा नगरी की रक्षा के लिए एक देव को भेजा, तो विक्रम ने देव से लड़ाई की और उसे हराया। देव ने विक्रम को जीवनदान दिया और बताया कि वे तीन जन्मों में एक साथ थे। कहानी में प्रेम, धोखा, और आत्मज्ञान की गहरी बातें छिपी हैं।
बेताल पच्चीसी - 1
Somadeva
द्वारा
हिंदी लघुकथा
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विवरण
बहुत पुरानी बात है। धारा नगरी मे ने उसे मार डाला और स्वयं राजा बन बैठा। उसका राज्य दिनोंदिन बढ़ता गया और वह सारे जम्बूद्वीप का राजा बन बैठा। एक दिन उसके मन में आया कि उसे घूमकर सैर करनी चाहिए और जिन देशों के नाम उसने सुने हैं, उन्हें देखना चाहिए। सो वह गद्दी अपने छोटे भाई भर्तृहरि को सौंपकर, योगी बन कर, राज्य से निकल पड़ा।
बहुत पुरानी बात है। धारा नगरी मे ने उसे मार डाला और स्वयं राजा बन बैठा। उसका राज्य दिनोंदिन बढ़ता गया और वह सारे जम्बूद्वीप का राजा बन बैठा। एक दिन उस...
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