रवींद्रनाथ टैगोर की "रूस के पत्र" के इस अध्याय में वे अपनी रूस यात्रा के अनुभव साझा करते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य रूस में शिक्षा के प्रचार के तरीकों और उसके परिणामों का अवलोकन करना था। टैगोर का मानना है कि भारत की समस्याओं, जैसे जाति-भेद, धार्मिक विवाद और आर्थिक कठिनाइयाँ, का मूल कारण अशिक्षा है। वे बताते हैं कि ब्रिटिश शासन ने भी शिक्षा के अभाव को भारत के लिए एक बड़ा अपराध माना है। वे शिक्षा को एक ऐसी शक्ति के रूप में देखते हैं जिसने अन्य देशों, जैसे जापान और तुर्की, को प्रगति के रास्ते पर अग्रसर किया है। टैगोर चिंता व्यक्त करते हैं कि भारत में शिक्षा का प्रकाश नहीं आ रहा है, जिससे देश में जागरूकता की कमी है। उनके अनुसार, भारत अभी भी अंधकार में है और इसकी उन्नति की राह में कई बाधाएँ हैं। टैगोर ने अपनी यात्रा के दौरान यह समझा कि शिक्षा के माध्यम से ही समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। रूस के पत्र - 8 Rabindranath Tagore द्वारा हिंदी फिक्शन कहानी 1.2k 3k Downloads 8.8k Views Writen by Rabindranath Tagore Category फिक्शन कहानी पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण रूस से लौट आया, अब जा रहा हूँ अमेरिका की ओर। रूस यात्रा का मेरा एकमात्र उद्देश्य था, वहाँ जनसाधारण में शिक्षा प्रचार का काम किस तरह चलाया जा रहा है और उसका फल क्या हो रहा है, थोड़े समय में यह देख लेना। मेरा मत यह है कि भारतवर्ष की छाती पर जितना दुख आज अभ्रभेदी हो कर खड़ा है, उसकी एकमात्र जड़ है अशिक्षा। जाति-भेद, धर्म-विऱोध, कर्म-जड़ता, आर्थिक दुर्बलता -- इन सबको जकड़े हुए है शिक्षा का अभाव। साइमन कमीशन ने भारत के समस्त अपराधों की सूची समाप्त करने के बाद ब्रिटिश शासन का सिर्फ एक ही अपराध कबूल किया है, वह है यथेष्ट शिक्षा प्रचार की त्रुटि। मगर और कुछ कहने की जरूरत भी न थी। Novels रूस के पत्र सोवियत शासन के प्रथम परिचय ने मेरे मन को खास तौर से आकर्षित किया है, यह मैं पहले ही कह चुका हूँ। इसके कई विशेष कारण हैं और वे आलोचना के योग्य हैं। रू... More Likes This Oyy Mr. Vampire - 1 द्वारा kusum kumari बारह बरश का इंतज़ार - 2 द्वारा kusum kumari Second Chance - 1 द्वारा wang pang माई डियर प्रोफेसर - भाग 21 द्वारा Vartika reena The Billionaire Werewolf's Obsession - 1 द्वारा Sipra Mohanty मेरा बच्चा... लौटा दो... द्वारा Wajid Husain प्रेम शाश्वतं, मृत्यु शाश्वतः - प्रलोग द्वारा Vartika reena अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी