इस कहानी में रवींद्रनाथ टैगोर ने रूस की क्रांति और वहां के लोगों की साहसिकता का वर्णन किया है। उन्होंने अपने पत्र में यह व्यक्त किया है कि उन्हें अपने मित्रों के जवाब का इंतजार है, जो नहीं आ रहा, जिससे उन्हें उदासी और प्रतीक्षा का अनुभव हो रहा है। टैगोर ने रूस में हो रहे बड़े परिवर्तनों की प्रशंसा की है और बताया है कि कैसे लोग 'सनातन' के जंजीरों को तोड़कर एक नई दुनिया बनाने में जुटे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह क्रांति लंबे समय से आवश्यक थी और इसके लिए लोगों ने बहुत संघर्ष किया है। रूस के लोग विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य को पाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं, और उनका आर्थिक बल भले ही कम हो, लेकिन उनकी प्रतिज्ञा और साहस अद्वितीय है। रूस के पत्र - 3 Rabindranath Tagore द्वारा हिंदी फिक्शन कहानी 3.3k 2.9k Downloads 8.9k Views Writen by Rabindranath Tagore Category फिक्शन कहानी पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण बहुत दिन हुए तुम दोनों को पत्र लिखे। तुम दोनों की सम्मिलित चुप्पी से अनुमान होता है कि वे युगल पत्र मुक्ति को प्राप्त हो चुके हैं। ऐसी विनष्टि भारतीय डाकखानों में आजकल हुआ ही करती है, इसीलिए शंका होती है। इसी वजह से आजकल चिट्ठी लिखने को जी नहीं चाहता। कम से कम तुम लोगों की तरफ से उत्तर न मिलने पर मैं चुप रह जाता हूँ। निःशब्द रात्रि के प्रहर लंबे मालूम होने लगते हैं -- उसी तरह 'निःचिट्ठी' का समय भी कल्पना में बहुत लंबा हो जाता है। इसी से रह-रह कर ऐसा मालूम होने लगता है, मानो लोकांतर-प्राप्ति हुई हो। मानो समय की गति बदल गई है -- घड़ी बजती है लंबे तालों पर। द्रौपदी के चीर-हरण की तरह मेरा देश जाने का समय जितना खिंचता जाता है, उतना ही अनंत हो कर वह बढ़ता ही चला जाता है। जिस दिन लौटूँगा, उस दिन तो निश्चित ही लौटूँगा -- आज का दिन जैसे बिल्कुल निकट है, वह दिन भी उसी तरह निकट आएगा, यही सोच कर सांत्वना पाने की कोशिश कर रहा हूँ। Novels रूस के पत्र सोवियत शासन के प्रथम परिचय ने मेरे मन को खास तौर से आकर्षित किया है, यह मैं पहले ही कह चुका हूँ। इसके कई विशेष कारण हैं और वे आलोचना के योग्य हैं। रू... More Likes This चिट्ठी का इंतजार - भाग 1 द्वारा Deepak Bundela Arymoulik उजाले की राह द्वारा Mayank Bhatnagar Operation Mirror - 3 द्वारा bhagwat singh naruka DARK RVENGE OF BODYGARD - 1 द्वारा Anipayadav वाह साहब ! - 1 द्वारा Yogesh patil मेनका - भाग 1 द्वारा Raj Phulware बेवफाई की सजा - 1 द्वारा S Sinha अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी