कहानी "पी कहाँ?" में, एक साहबजादा (राजकुमार) जो रियासत का मालिक है, शेर के कटघरे के पास बैठा है और मनोरंजन की तलाश में है। एक सिपाही का लड़का शेर की दुम खींचता है, जिससे शेर गुस्से में आता है और लड़का गिर जाता है। यह दृश्य साहबजादे को हंसी में डाल देता है, लेकिन उसे अपनी बेगम के बारे में चिंता होती है, जो शायद परेशान होगी। वह उदास होकर अपने आदमी से कहता है कि नवाबगंज की चौकी पर एक सवार भेजकर पता लगाया जाए कि उसकी पत्नी ने बेटे या बेटी को जन्म दिया है। वह एक पत्र लिखता है जिसमें वह अपनी पत्नी को याद करता है और जानना चाहता है कि उसका बच्चा क्या है। सवार जल्दी से जाता है लेकिन तीन घंटे बाद लौटता है और बताता है कि उसे कोई जानकारी नहीं मिली। इस पर साहबजादा उदास हो जाता है और अपने आदमी के साथ दौड़ पड़ता है। कहानी में भावनाओं का मिश्रण है, जिसमें हंसी, चिंता और चिंता का अनुभव किया जाता है। पी कहाँ? - 7 Ratan Nath Sarshar द्वारा हिंदी फिक्शन कहानी 2.6k Downloads 7.1k Views Writen by Ratan Nath Sarshar Category फिक्शन कहानी पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण शर को रातब दिया जाता था, और वह साहबजादा, कि खुद रियासत का मालिक था, दिल बहलाने के लिए दिल्लगी देख रहा था। एक सिपाही के लौंडे ने शेर की दुम, जो कटघरे के बाहर थी पकड़ के खींची। शेर उस वक्त बकरी की रान खा रहा था। पहले जरा यों ही सा गुर्राया। जब उस लौंडे ने जोर से दुम को खींचा, तो शेर इस जोर से डँकारा और फिरा कि लौंडा गिर पड़ा। शेर बदस्तूर गोश्त खाने लगा। और उस साहबजादे को उस लौंडे की शरारत और बौखलाहट पर बेतरह हँसी आई, - और पहली ही मर्तबा था कि इस मकान में आ कर ये हँसे हों। हँसी के आते ही अचानक उसको ख्याल आया कि - अरे! मैं हँस रहा हँ! हाय, वह बेचारी इस वक्त क्या जाने क्या कर रही होगी, और सोती न होगी तो बेचैन जरूर होगी। और मैं कमबख्त हँस रहा हूँ! Novels पी कहाँ? पी कहाँ! पी कहाँ! पी कहाँ! पी कहाँ!; मंगल का दिन और अँधेरी रात, बरसात की रात। दो बज के सत्ताईस मिनट हो आए थे। तीन का अमल। सब आराम में। सोता संसार, जा... More Likes This RAJPUTANA - The War of Love and Revenge - 1 द्वारा Aarushi Singh Rajput पहला प्यार ? - 2 द्वारा Alone Soul सुनहरा फलक - 1 द्वारा Digvijay Singh Rathore खलनायिका के रूप में पुनर्जन्म - 1 द्वारा Fictional world THE UNTOLD CHAPTER - 1 द्वारा Neha Banchhor कुरिवाज की केद से सपनों की उड़ान तक - 1 द्वारा miss k त्रिवेणी: एक आदर्श बहू से बेकार बहू बनने तक का सफर - 1 द्वारा Triveni chakrdhari अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी