कहानी "कबूतरों वाला साईं" पंजाब के एक छोटे से गांव में माई जीवां के जीवन पर केंद्रित है। माई जीवां एक ग़लाफ़ चढ़ी कब्र के पास आग जलाने का काम कर रही है। उसकी आंखों में आंसू हैं और वह आग को सुलगाने की कोशिश कर रही है। उसकी उम्र के चलते उसके चेहरे पर झुर्रियां हैं, और वह अपने पति गामा साईं की यादों में खोई हुई है। गामा साईं गांव में बहुत लोकप्रिय थे और एक कुशल कुम्हार थे, जिन्होंने तकीए की देखभाल के लिए बर्तन बनाना छोड़ दिया था। माई जीवां के पास गामा साईं द्वारा बनाई गई कूंडियां हैं, जिन्हें वह बड़े गर्व से इस्तेमाल करती है। गांव के लोग अक्सर तकीए में इकट्ठा होते हैं, जहां वे भंग पीते हैं। गामा साईं की अनुपस्थिति में, उसके चेले अब भंग घोटने का काम करते हैं। माई जीवां की आग उन लोगों के लिए जरूरी है, जो तकीए में आते हैं। सुबह और शाम को तकीए में रौनक रहती है, लेकिन दोपहर के समय कुछ लोग माई जीवां के पास बैठकर समय बिताते हैं। यह कहानी माई जीवां के संघर्ष और गांव के सांस्कृतिक जीवन को दर्शाती है। कबूतरों वाला साईं Saadat Hasan Manto द्वारा हिंदी लघुकथा 5.3k 4.1k Downloads 10.9k Views Writen by Saadat Hasan Manto Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण पंजाब के एक सर्द देहात के तकिए में माई जीवां सुबह सवेरे एक ग़लाफ़ चढ़ी क़ब्र के पास ज़मीन के अंदर खुदे हुए गढ़े में बड़े बड़े उपलों से आग लगा रही है। सुबह के सर्द और मटियाले धुँदलके में जब वो अपनी पानी भरी आँखों को सुकेड़ कर और अपनी कमर को दुहरा करके, मुँह क़रीब क़रीब ज़मीन के साथ लगा कर ऊपर तले रखे हुए उपलों के अंदर फूंक घुसेड़ने की कोशिश करती है तो ज़मीन पर से थोड़ी सी राख उड़ती है और इस के आधे सफ़ैद और आधे काले बालों पर जो कि घिसे हुए कम्बल का नमूना पेश करते हैं बैठ जाती है और ऐसा मालूम होता है कि उस के बालों में थोड़ी सी सफेदी और आगई है। Novels मंटो की श्रेष्ठ कहानियां दिन भर की थकी माँदी वो अभी अभी अपने बिस्तर पर लेटी थी और लेटते ही सो गई। म्युनिसिपल कमेटी का दारोगा सफ़ाई, जिसे वो सेठ जी के नाम से पुकारा करती थी। अभ... More Likes This कहानी में छुपी एक सन्देश - 1 द्वारा Std Maurya मेरे समाज में ऐसा क्यों होता हैं - भाग 1 द्वारा Std Maurya ऐसे ही क्यों होता हैं? - 1 द्वारा Std Maurya एक डिवोर्स ऐसा भी - 1 द्वारा Alka Aggarwal पहली मुलाक़ात - 1 द्वारा puja नेहरू फाइल्स - भूल-113 द्वारा Rachel Abraham प्रतिघात: दिल्ली की वो शाम - 2 द्वारा Abantika अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी