कहानी में मियां साहब और बेगम साहबा के बीच बातचीत का वर्णन है। मियां साहब कहते हैं कि बहुत समय बाद आज मिलने का मौका मिला है और अपनी व्यस्तताओं के बावजूद वह समाज की जिम्मेदारियों को संभालने की बात करते हैं। बेगम साहबा उनकी बातों से सहमति जताती हैं और उन्हें नर्म दिल मानती हैं। वह मियां साहब की सामाजिक गतिविधियों के बारे में जानती हैं और उन्हें उनकी पूर्व की तक speeches भेजने का आग्रह करती हैं ताकि वह उन्हें पढ़ सकें। इस प्रकार, यह संवाद उनकी जिम्मेदारियों और सामाजिक कार्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। ऊपर निचे और दरमियान Saadat Hasan Manto द्वारा हिंदी लघुकथा 12.7k 6.7k Downloads 28.6k Views Writen by Saadat Hasan Manto Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण मियां साहब बहुत देर के बाद आज मिल बैठने का इत्तिफ़ाक़ हुआ है। बेगम साहबा जी हाँ! मियां साहब मस्रूफ़ियतें....... बहुत पीछे हटता हूँ मगर ना-अहल लोगों का ख़याल करके क़ौम की पेश की हुई ज़िम्मेदारीयां सँभालनी ही पड़ती हैं Novels मंटो की श्रेष्ठ कहानियां दिन भर की थकी माँदी वो अभी अभी अपने बिस्तर पर लेटी थी और लेटते ही सो गई। म्युनिसिपल कमेटी का दारोगा सफ़ाई, जिसे वो सेठ जी के नाम से पुकारा करती थी। अभ... More Likes This एक पुरुष—सबके बीच अकेला - 1 द्वारा Aloka Patel Anime - 2 द्वारा shifa आखिरी कोशिश - 1 द्वारा Subhan Khan कहाँ खो गया वह होशियार अजय - 1 द्वारा Anamika ठुकराईन नयना देवी - 3 द्वारा Vandna Sharma लोकतंत्र की ज़मीनी सच्चाई - 1 द्वारा Std Maurya दिल्ली जिमखाना क्लब द्वारा Devendra Kumar अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी