इस कहानी में भारतीय रुपइये की गिरती हुई स्थिति का वर्णन किया गया है। रुपइया, जो कभी सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण माना जाता था, अब गिरता जा रहा है। लेखक यह बताते हैं कि कैसे वित्त मंत्री और समाज के लोग रुपइये को संभालने की कोशिश करते हैं, लेकिन हर बार यह और गिर जाता है, जैसे कि क्रिकेट खिलाड़ी गिरते हैं। रुपइया खुद को उठाने से मना करता है, यह कहते हुए कि उसे अपने हाल पर छोड़ दिया जाए क्योंकि उठाने से कोई फायदा नहीं। लेखक दावा करते हैं कि गिरते हुए को उठाना उनका राष्ट्रीय धर्म है, लेकिन रुपइया कहता है कि आर्थिक दृष्टि से वे खुद भी गिर चुके हैं, और आज के समय में नैतिकता से ज्यादा अर्थ का महत्व है। कहानी इस बात को उजागर करती है कि वित्तीय स्थिति और नैतिकता के बीच का संबंध कैसे बदल रहा है। येल्लो, फिर गिर गया... Girish Pankaj द्वारा हिंदी लघुकथा 729 1.8k Downloads 7k Views Writen by Girish Pankaj Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण Ye.. Lo, Phir Ghir Gaya.. More Likes This नेहरू फाइल्स - भूल-113 द्वारा Rachel Abraham प्रतिघात: दिल्ली की वो शाम - 2 द्वारा Abantika हिकमत और कमाई द्वारा Devendra Kumar उड़ान (1) द्वारा Asfal Ashok नौकरी द्वारा S Sinha रागिनी से राघवी (भाग 1) द्वारा Asfal Ashok अभिनेता मुन्नन द्वारा Devendra Kumar अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी