इस कहानी में एक व्यक्ति अपने मित्रों को आरक्षण के मुद्दे पर अपनी चिंताओं के बारे में बताता है। वह कहता है कि आरक्षण जाति के आधार पर नहीं, बल्कि आर्थिक आधार पर होना चाहिए। वह यह तर्क करते हैं कि पिछड़ी जातियों को आरक्षण इसलिए दिया गया था ताकि उन्हें शिक्षा और नौकरी में अवसर मिल सकें, लेकिन अब तक इस प्रणाली का लाभ केवल कुछ लोगों ने ही उठाया है। लेखक यह भी बताते हैं कि 67 साल बाद भी अगर कोई दलित इंजीनियर या डॉक्टर नहीं बना, तो आरक्षण का क्या फायदा है। वे यह कहते हैं कि जिन लोगों ने आरक्षण का लाभ उठाया है, वे अब पिछड़े नहीं रहे, और इससे सच में पिछड़े लोगों को नुकसान हो रहा है। आखिर में, वे मायावती का उदाहरण देते हैं, जो प्रमोशन में आरक्षण की कोशिश कर रही थी, और इस पर व्यंग्य करते हैं। उनका मुख्य संदेश है कि अब समय आ गया है कि लोग अपनी मेहनत से सफलता हासिल करें, न कि आरक्षण के सहारे। आरक्छन आर्थिक आधार पर होना चाहिए Virendra Nagar द्वारा हिंदी पत्रिका 3.3k 2.2k Downloads 7.1k Views Writen by Virendra Nagar Category पत्रिका पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण Aarakshan - Aarthik Adhaar Par Hona Chahiye More Likes This Star Sentinals - 1 द्वारा Ravi Bhanushali Vulture - 1 द्वारा Ravi Bhanushali नेहरू फाइल्स - भूल-85 द्वारा Rachel Abraham इतना तो चलता है - 3 द्वारा Komal Mehta जब पहाड़ रो पड़े - 1 द्वारा DHIRENDRA SINGH BISHT DHiR कल्पतरु - ज्ञान की छाया - 1 द्वारा संदीप सिंह (ईशू) नव कलेंडर वर्ष-2025 - भाग 1 द्वारा nand lal mani tripathi अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी