इस कहानी में एक छात्र के पिता हिंदी की अध्यापिका से नाराज़ हैं क्योंकि उनके बेटे को हिंदी परीक्षा में केवल एक अंक मिला है, जो कि अच्छी लिखावट के लिए था। पिता का आरोप है कि अध्यापिका ने अपने बेटे को सिखाया है कि "हिंदी भाषा को जैसे बोला जाता है, वैसे ही लिखा जाता है।" जब सभी अभिभावक उस छात्र की उत्तर पुस्तिका देखते हैं, तो वे हैरान रह जाते हैं। छात्र ने अपने मामाजी के लिए धन्यवाद पत्र में मजेदार और अव्यवस्थित भाषा में लिखा है, जिसमें उसने बर्थडे का तोहफा भेजने के लिए फनी तरीके से शिकायत की है। इसके अलावा, परीक्षा के दूसरे भाग में वर्षा ऋतु पर उसके द्वारा लिखा गया प्रस्ताव भी असामान्य और व्यंग्यात्मक है, जिसमें उसने बारिश के प्रभावों का वर्णन किया है। अंत में, छात्र अध्यापिका के पास जाकर यह कहता है कि उसने पूरे पेपर को सुंदर शब्दों में लिखा है, न कि केवल प्रस्ताव को। यह कहानी शिक्षा प्रणाली की कुछ कमियों और छात्रों के रचनात्मकता को दर्शाती है। ठीक तो हैं Jahnavi Suman द्वारा हिंदी हास्य कथाएं 2.7k 2.7k Downloads 7.1k Views Writen by Jahnavi Suman Category हास्य कथाएं पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण Thik to hain More Likes This फ़ेक फ़िऑन्से चैलेंज - 1 द्वारा priyanka katiyar Rebirth of a Bench - Index द्वारा Amardeep Kumar God Wishar - 3 द्वारा Ram Make Hero - 5 द्वारा Ram Make Potty Robbers and Me - 1 द्वारा BleedingTypewriter रशीली भाभी का जलवा द्वारा Md Siddiqui चेकपोस्ट:चाणक्य - 1 द्वारा Ashish jain अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी