यह कविता दिसंबर 2017 में लिखी गई है, जिसमें लेखक यह बताना चाहता है कि रचना को पढ़ने की आवश्यकता नहीं है। वह दर्शकों को यह प्रेरणा देता है कि वे अपनी आँखों से प्रकृति के सौंदर्य को देखें, जैसे कि टिमटिमाते आसमान, घूमती धरती और बढ़ते वृक्ष। वे यह भी कहते हैं कि लोग अपने हाथ में पत्थर लेकर दूर फेंक सकते हैं, फल-फूल चुन सकते हैं, और संवाद कर सकते हैं। यदि व्यक्ति मधुमक्खियों की तरह शहद बना सकता है या बंजर भूमि को सींच सकता है, तो उसे कविता पढ़ने की आवश्यकता नहीं है। इस प्रकार, लेखक यह संदेश देता है कि असली रचनात्मकता केवल शब्दों में नहीं, बल्कि जीवन में सक्रिय रूप से योगदान देने में है। दिसम्बर २०१७ की कविताएं महेश रौतेला द्वारा हिंदी कविता 2.8k 2.1k Downloads 7.6k Views Writen by महेश रौतेला Category कविता पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण दिसम्बर २००१७ की कविताओं में विभिन्न संदर्भों की कविताएं हैं। जो जीवन के अलग-अलग अवस्थाओं को संबोधित करती, एक खोज हैं। जीवन मूल्यों को इंगित करती मनोदशा है। More Likes This कविताओं का संग्रह- भाग 1 द्वारा prachi Gurjar चारपाई की व्यथा द्वारा Vandna Sharma शब्द और सत्य - भाग 1 द्वारा Shivraj Bhokare मन के अल्फाज - ख्वाहिश की कविताएं। - 1 द्वारा khwahishh श्रीरामचरितमानस - भाग 1 द्वारा Shivam Kumar Pandey सादगी के स्वर : लेखिका गीता कुमारी - 1 द्वारा Geeta Kumari जिंदगी संघर्ष से सुकून तक कविताएं - 1 द्वारा Kuldeep Singh अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी