सूरज, हल्द्वानी का एक युवा, बी.ए. पास करने के बाद भी नौकरी न मिलने पर दिल्ली आया। नए शहर में अकेले रहने और खाने की समस्या का सामना करते हुए, उसने एक टैक्सी कंपनी में गाड़ियों की सफाई का काम शुरू किया। सूरज ने मेहनत से काम किया, जिससे गाड़ियाँ चमकदार बनीं और ड्राइवर खुश हुए। उसकी लगन और मेहनत से सभी ड्राइवर उसे टिप देते थे, जिससे उसकी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी होने लगीं। सूरज ने अपने काम को भगवान माना और हमेशा संतुष्ट रहने की कोशिश की। अंततः, वह अपनी माँ को पैसे भेजने में सफल रहा और अपने काम से खुश रहा। सफाई वाला Ved Prakash Tyagi द्वारा हिंदी लघुकथा 25.5k 2.1k Downloads 17.7k Views Writen by Ved Prakash Tyagi Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण एक दिन एक ड्राईवर रोते हुए सूरज के पास काम मांगने आया, पहले तो सूरज ने मना कर दिया लेकिन वह व्यक्ति सूरज के पैरों में गिर कर गिड्गिड़ाने लगा। जो व्यक्ति धार्मिक प्रवृति का हो, दया भाव जिसके मन में हो, वो किसी का गिड्गिड़ाना कैसे देख सकता था More Likes This हिकमत और कमाई द्वारा Devendra Kumar उड़ान (1) द्वारा Asfal Ashok नौकरी द्वारा S Sinha रागिनी से राघवी (भाग 1) द्वारा Asfal Ashok अभिनेता मुन्नन द्वारा Devendra Kumar यादो की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई (1) द्वारा Ramesh Desai मां... हमारे अस्तित्व की पहचान - 3 द्वारा Soni shakya अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी