"अपना घरौंदा" कहानी देवकी की भावनाओं और उसके घर को छोड़ने के अनुभव के इर्द-गिर्द घूमती है। देवकी अपने घर को खाली करने के लिए मजबूर है, क्योंकि नए मकान मालिक का ट्रक आने वाला है। उसने अपने घर के लिए वर्षों मेहनत की है और हर सामान उसके लिए यादों से भरा है। जब वह अपने प्रिय सामान को देखकर आँसुओं में डूब जाती है, तो उसे अपने घर को छोड़ने का गहरा दुख होता है। देवकी की यादें और उसके घर से जुड़ी भावनाएँ उसे परेशान करती हैं, खासकर जब उसे एहसास होता है कि यह घर अब किसी और का होने जा रहा है। उसके बेटे दुष्यंत ने घर की चाबियाँ नए मालिक को सौंप दी हैं, और देवकी खुद को अकेला और असहाय महसूस करती है। कहानी में देवकी का दिल्ली शहर के प्रति अजनबीपन भी प्रदर्शित होता है, जो पहले उसकी पहचान का हिस्सा था। अंततः, वह अपने परिवार के साथ कार में बैठती है, लेकिन उसके दिल में घर की यादें और उसकी खोई हुई पहचान का दर्द बना रहता है। अपना घरोंदा Jahnavi Suman द्वारा हिंदी लघुकथा 23k 2.6k Downloads 8.5k Views Writen by Jahnavi Suman Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण Apna Gharonda More Likes This जग्गू - द डिटैक्टिव - 1 द्वारा Rakesh Kumar Sharma आज्ञा द्वारा Rajeev kumar पता बताते दिन द्वारा महेश रौतेला तुम हो तो सब कुछ है - भाग 1 द्वारा Ankit Khatri मेरी जिंदगी का सफर 1 द्वारा Ankit Khatri अहमदाबाद के चर्चे द्वारा Devendra Kumar एक पुरुष—सबके बीच अकेला - 1 द्वारा Aloka Patel अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी