वो पुरानी नाव और वो मेरा दुश्मन Ved Prakash Tyagi द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

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वो पुरानी नाव और वो मेरा दुश्मन

Ved Prakash Tyagi मातृभारती सत्यापित द्वारा हिंदी कविता

एक एक लकड़ी ले जाकर मत जलाओ, आग के हवाले कर दो एक साथ, मेरा अब कोई काम नहीं, बेकार ही जगह घेरी है। जलकर मैं भी नूतन बन जाऊँ, अब किस बात की देरी है। मैं भी फिर ...और पढ़े


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