सिन्हा साहब अपने गाँव के प्रति बहुत प्रेम करते थे, हालाँकि वे दस साल की उम्र में पटना चले आए थे। उन्होंने वहीं अपनी पढ़ाई पूरी की और इंजीनियरिंग करके बोकारो स्टील प्लांट में नौकरी शुरू की। गाँववालों ने उनकी इज्जत की, क्योंकि वे गाँव के पहले इंजीनियर थे। एक साल बाद, उनकी शादी प्रेमा से हुई, जो एक ग्रेजुएट और कुशल गृहिणी थीं। सिन्हा साहब रिटायरमेंट के बाद बोकारो, पटना या रांची में बस सकते थे, लेकिन शादी के बाद उन्होंने अपनी पत्नी को हमेशा गाँव में रहने का निर्णय लिया। सपनों की तुरपाई S Sinha द्वारा हिंदी लघुकथा 2.8k 3.5k Downloads 10.1k Views Writen by S Sinha Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण सपनों की तुरपाई ,यह एकमात्र छोटी कहानी है। एक भले इंसान की कहानी जिसने अपनी कमाई का ज्यादा हिस्सा अपने भाई भतीजे की भलाई के लिए खर्च कर दिया। सेवानिवृत्ति के पश्चात् वह शहर से अपने गाँव में रहने आता है यह सोच कर कि उसके भाई भतीजे उसका साथ देंगे। पर वे तो उसी भले इंसान की जमीन जायदाद हड़पने को तैयार बैठे हैं। More Likes This दिल्ली जिमखाना क्लब द्वारा Devendra Kumar Fake Boyfriend real Feelings - 1 द्वारा Mawaskar Pratigya कॉल - 1 द्वारा sky कुछ बातें मां बाप के दिल की । - 3 द्वारा miss k पढ़ाकू द्वारा Vandna Sharma कोन्निचिवा: माय देसी लव - 1 द्वारा Kajal Soam किराए का घर द्वारा Vandna Sharma अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी