इस कहानी में यह बताया गया है कि हर जीव एक स्वतंत्र आत्मा है और उसका धरती पर आने का एक उद्देश्य होता है। सभी जीवों का पहला और अंतिम संबंध परमात्मा से होता है, जबकि अन्य रिश्ते दुनियावी होते हैं। ये रिश्ते मनुष्य को कुछ समय तक बांध सकते हैं, लेकिन मृत्यु के क्षणों में आत्मा का परमात्मा से जुड़ने का अनुभव होता है। जब मनुष्य परलोक में पहुँचता है, तो वह अपने पीछे छूटे रिश्तों की याद करता है, जैसे एक बच्चा नए स्कूल में अपनी माँ को याद करता है। वह अपने परिचितों को देखता है और उनके दुख में विचलित होता है, लेकिन जब वे उसे भूलने लगते हैं, तो वह परलोक का अभ्यस्त हो जाता है और महसूस करता है कि वह परमात्मा का अंश है। इस प्रकार, वह परलोक का निवासी बन जाता है और अपने स्थायी संबंध का अनुभव करता है। कहानी अंत में यह प्रश्न उठाती है कि इस लोक और उस लोक के बीच क्या संबंध है। इहलोक से परलोक तक VANITA BARDE द्वारा हिंदी पत्रिका 1.3k 3.2k Downloads 14.9k Views Writen by VANITA BARDE Category पत्रिका पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण It is a article written by Vanita Barde about parlok .To know more download the article.Thanks Thanks Thanks Thanks Thanks Thanks Thanks Thanks Thanks More Likes This नेहरू फाइल्स - भूल-85 द्वारा Rachel Abraham इतना तो चलता है - 3 द्वारा Komal Mehta जब पहाड़ रो पड़े - 1 द्वारा DHIRENDRA SINGH BISHT DHiR कल्पतरु - ज्ञान की छाया - 1 द्वारा संदीप सिंह (ईशू) नव कलेंडर वर्ष-2025 - भाग 1 द्वारा nand lal mani tripathi कुछ तो मिलेगा? द्वारा Ashish आओ कुछ पाए हम द्वारा Ashish अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी