"रंगभूमि" के 37वें अध्याय में प्रभु सेवक का वर्णन है, जो एक उत्साही और साहसी व्यक्ति हैं। उन्होंने सेवक-दल को नई ऊर्जा दी और इसकी संख्या बढ़ने लगी। प्रभु सेवक की सज्जनता और सहृदयता लोगों को आकर्षित करती थी। उन्होंने सामाजिक कार्यों से शुरू करके इस संस्था को राजनीतिक दिशा में भी ले जाने का प्रयास किया। वह गरीबों पर अत्याचार देखकर हिंसात्मक हो जाते थे और निर्बलों को अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए प्रेरित करते थे। प्रभु सेवक का मानना था कि आत्मसम्मान की रक्षा सबसे महत्वपूर्ण है, और उन्हें विश्वास था कि जनता को अपने अधिकारों की रक्षा खुद करनी होगी। उनके साथियों में भी साहसिकता की भावना थी, कुछ लोग तो प्रजा में असंतोष पैदा करने को भी आवश्यक मानते थे। जैसे-जैसे सेवकों की प्रसिद्धि बढ़ी, अधिकारियों का उन पर संदेह भी बढ़ने लगा। कुँवर साहब को यह डर सताने लगा कि कहीं सरकार इस संस्था का दमन न कर दे, जिससे उनकी स्थिति भी खतरे में पड़ सकती है। रंगभूमि अध्याय 37 Munshi Premchand द्वारा हिंदी फिक्शन कहानी 1.8k 3.2k Downloads 9k Views Writen by Munshi Premchand Category फिक्शन कहानी पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण ‘रंगभूमि’ उपन्यास का केन्द्र बिन्दु है - दैन्य और दारिद्र्य में ग्राम समाज का जीवन ‘रंगभूमि’ का नायक सूरदास जनहित के लिए होम होने की विचित्र क्षमता रखता है। रंगभूमि के कथानक में अनेक रंग-बिरंगे धागे लिपटे हुए हैं। उपन्यास का केन्द्र बिन्दु है - दैन्य और दारिद्र्य में ग्राम समाज का जीवन और साथ ही, एक ग्राम सेवक का ईसाई परिवार है, जो गांव के चारगाह पर सिगरेट का कारखाना लगाने के लिए अधीर है। अनेक धनी व्यक्ति हैं, जिनके बीच अगणित अन्तर्विरोध हैं - लोभ, ख्याति की लालसा और महत्त्वाकांक्षाएं। महाराजा हैं, उनके अत्पीड़न के लिए रजवाड़े हैं। उपन्यास का घटनाचक्र प्रबल वेग में घूमता है। कथा में वेग और नाटकीयता दोनों ही हैं। Novels रंगभूमि ‘रंगभूमि’ उपन्यास का केन्द्र बिन्दु है - दैन्य और दारिद्र्य में ग्राम समाज का जीवन ‘रंगभूमि’ का नायक सूरदास जनहित के लिए होम होने की विचित्र क्षम... More Likes This THE PIANO MEN - 1 द्वारा rajan चिट्ठी का इंतजार - भाग 1 द्वारा Deepak Bundela Arymoulik उजाले की राह द्वारा Mayank Bhatnagar Operation Mirror - 3 द्वारा bhagwat singh naruka DARK RVENGE OF BODYGARD - 1 द्वारा Anipayadav वाह साहब ! - 1 द्वारा Yogesh patil मेनका - भाग 1 द्वारा Raj Phulware अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी