कहानी में एक युवा व्यक्ति और उसके पिता के बीच विवाह के मुद्दे पर चर्चा हो रही है। युवक अपने पिता को भविष्य में आने वाली कठिनाइयों के बारे में बताता है और यह महसूस करता है कि उसे अपनी जिंदगी का नियंत्रण खुद रखना चाहिए, न कि भाग्य के भरोसे। पिता इस बात को स्वीकार नहीं करते हैं और कहते हैं कि उन्होंने पहले ही लड़की को पसंद कर लिया है और अब मना कर रहे हैं। युवक बताता है कि उसने लड़की को ठीक से नहीं जाना और उसे शादी नहीं करनी है क्योंकि उसे डॉक्टर बनना है। पिता का कहना है कि लड़की उससे शादी करना चाहती है और यह सही नहीं है कि वह उसकी भावनाओं से खिलवाड़ करे। युवक को इस शादी से डर लगता है और वह सपनों में बुरे संकेत देखता है, लेकिन पिता उसे समझाते हैं कि सपने अक्सर उल्टे होते हैं और शादी तो एक दिन करनी ही है। युवक यह समझता है कि उसके पिता उस लड़की की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाना चाहते हैं। दोहरा दर्द Lakshmi Narayan Panna द्वारा हिंदी जीवनी 9k 3.4k Downloads 9.3k Views Writen by Lakshmi Narayan Panna Category जीवनी पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण दोहरा दर्द भाग -2 का कुछ अंश मेरे और पिताजी के बीच बहुत सारी बातें हुईं मैं उन्हें भविष्य में आने वाली कठिनाइयों से अवगत कराता और वे भाग्य और भगवान की बातें करते । मैं कहता समय पर जाग जाने वाले अपना भाग्य खुद लिख सकते हैं । भाग्य के भरोसे तो बुजदिल बैठा करते हैं । यह मेरी जिंदगी है इसे मैं भाग्य के भरोसे नही छोड़ सकता । लेकिन ये क्या ………..….. Continue…………….(आगे पढ़ें) जो पिताजी कभी मेरी हर बात को मानते और समझते थे आज मेरी कोई बात मानने को तैयार नही थे । पिताजी कहने लगे कि पहले तो तुमने लड़की पसन्द कर ली अब मना कर रहे हो । यह ठीक बात नही है ऐसे किसी की इज्जत से खिलवाड़ नही करना चाहिए । मैंने उन्हें समझाया कि ऐसी कोई बात नही है कि मैंने उसे पसंद किया । मैं तो उसे ठीक से जनता भी नही हूँ । बस इतना है कि जिस स्कूल में मैं पढ़ाता हूँ वहीं वह भी पढ़ाती है । More Likes This खण्ड - 01 महाराणा सहस्त्र वर्षों का धर्मयुद्ध - 1.. बाप्पा रावल : मेवाड़ के संस्थापक राजा द्वारा Hind Gaurav सम्राट अशोक : तलवार, युद्ध और धर्म - 1 द्वारा Rishav raj मैं दादा-दादी की लाड़ली - 1 द्वारा sapna यादो की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई (2) द्वारा Ramesh Desai नकल से कहीं क्रान्ति नहीं हुई - 1 द्वारा Dr. Suryapal Singh अवसान विहीन अरुणेश द्वारा नंदलाल मणि त्रिपाठी प्रेमानंद जी : राधा-कृष्ण लीला के रसिक साधक - 1 द्वारा mood Writer अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी