कहानी "बंजर" में चौधरी साहब की हवेली में एक उत्सव का माहौल है। छोटी बहू प्रभा की मुहं दिखाई के अवसर पर महिलाएं गाने और नाचने में मग्न हैं, जबकि बड़ी बहू सुनीता सभी मेहमानों का स्वागत कर रही है। सुनीता और प्रभा के बीच गहरा बंधन है, क्योंकि सुनीता ने प्रभा को अपनी छोटी बहन की तरह पाला है। सुनीता विवाह के दो साल बाद भी माँ नहीं बन पाई है, जबकि प्रभा गर्भवती हो जाती है। जब प्रभा ने बेटे मोहन को जन्म दिया, तो सुनीता ने उसके लालन-पालन की सारी जिम्मेदारी ले ली और मोहन को अपनी माँ मान लिया। हालांकि, जैसे-जैसे समय बीतता है, सुनीता को एहसास होता है कि घर में उसका महत्व कम हो रहा है क्योंकि प्रभा अब माँ बन गई है। इस स्थिति से सुनीता में ईर्ष्या और असुरक्षा की भावना उत्पन्न होती है, जो इंसानी स्वभाव की जटिलता को दर्शाती है। कहानी इस रिश्ते में भावनाओं के उतार-चढ़ाव और पारिवारिक Dynamics का चित्रण करती है। बंजर Ashish Kumar Trivedi द्वारा हिंदी लघुकथा 6k 1.7k Downloads 4.5k Views Writen by Ashish Kumar Trivedi Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण जब सुनीता के दिल में छाए ईर्ष्या के बादल छंटे और क्रोध की ज्वाला शांत हुई तब उसे एहसास हुआ कि वह क्या कर बैठी है। उसने अपने ही हांथों खुद को बाँझ बना दिया। More Likes This उड़ान (1) द्वारा Asfal Ashok नौकरी द्वारा S Sinha रागिनी से राघवी (भाग 1) द्वारा Asfal Ashok अभिनेता मुन्नन द्वारा Devendra Kumar यादो की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई (1) द्वारा Ramesh Desai मां... हमारे अस्तित्व की पहचान - 3 द्वारा Soni shakya शनिवार की शपथ द्वारा Dhaval Chauhan अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी