यह कहानी "छोटू नहीं - घर का मुखिया" नामक एक चाय की दुकान पर काम करने वाले लड़के, विनय की है। वह अपनी पढ़ाई छोड़कर काम कर रहा है ताकि अपनी तीन बड़ी बहनों की पढ़ाई का खर्च उठा सके। विनय का परिवार आर्थिक समस्याओं का सामना कर रहा है, उसके पिता ने बैंक से ऋण लिया था और अब उसकी माँ बीमार हो गई हैं। विनय चाहता है कि उसका खाता स्टेट बैंक में खुल जाए ताकि वह अपनी पगार आसानी से अपनी माँ को भेज सके। कहानी में उसके सपनों, संघर्षों और भावनाओं को दर्शाया गया है। जब वह अपने पिता की अनुपस्थिति के कारण दुखी होता है, तो उसकी आँखों में आँसू आ जाते हैं। अंत में, वह अपनी पुरानी यादों को साझा करता है और अपने संघर्ष के बारे में बताता है। छोटू नहीं - घर का मुखिया Ved Prakash Tyagi द्वारा हिंदी लघुकथा 73.7k 2.9k Downloads 12.5k Views Writen by Ved Prakash Tyagi Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण जिन बच्चों को हम चाय की दुकान या ढाबे पर अक्सर छोटू कहकर पुकारते हैं वो वास्तव में अपने घर के मुखिया होते हैं। मेरी इस कहानी में एक बच्चे के बारे में बताया गया है कि कैसे वह छोटू बनकर अपने पूरे परिवार की ज़िम्मेदारी उठता है। More Likes This अहमदाबाद के चर्चे द्वारा Devendra Kumar एक पुरुष—सबके बीच अकेला - 1 द्वारा Aloka Patel Anime - 2 द्वारा shifa आखिरी कोशिश - 1 द्वारा Subhan Khan कहाँ खो गया वह होशियार अजय - 1 द्वारा Anamika ठुकराईन नयना देवी - 3 द्वारा Vandna Sharma लोकतंत्र की ज़मीनी सच्चाई - 1 द्वारा Std Maurya अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी