श्रेष्ठ हिंदी कहानियाँ पढ़ें और PDF में डाउनलोड करें होम कहानियां ट्रेन्डिंग हो रहे हैं फ़िल्टर: श्रेष्ठ हिंदी कहानियां पिंकू की परी - 1 द्वारा Deepak Kumar Tiwari (67) 2k बनारस की सुबह हो और चौराहे पर चाय-पान की दुकान पर पंचायत न हो, ऐसा तो बनारस के इतिहास में कभी हुआ ही नहीं है। सुबह की ताजी ठंडी ... पिंकू की परी - 3 द्वारा Deepak Kumar Tiwari 156 अम्मा की तोरई और स्पेसशिप का गियर'सूं-सूं... खटर-पटर...'पिंकू पांडे उस पतले, अंधेरे लोहे के पाइप के अंदर अपने घुटनों और कोहनियों के बल रेंग रहे थे। कंधे का गमछा ... Her Silent Secret - 15 द्वारा Sonam Brijwasi 222 शहर में उस रहस्यमय साइको किलर का नाम पिछले चार सालों से लोगों के बीच डर बन चुका था। चार सालों में कई अपराधी मारे गए थे। लेकिन पुलिस ... पुराने मित्र द्वारा Vijay Erry 243 पुराने मित्र लेखक: विजय शर्मा एरी (Vijay Sharma Erry)समय बीतता है, लोग बदलते हैं, शहर बदलते हैं, लेकिन कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जो दिल के किसी कोने में हमेशा ... अभी कहानी बाकी है - 6 द्वारा Ankit Khatri 552 नौकरी ढूँढनी है और किसी भी तरह अपने पैरों पर खड़ा होना है।देहरादून पहुँचे तो असली परीक्षा शुरू हुई।तभी मुझे अपनी ही कही हुई एक बात याद आई थी—“अपने ... Devil की दास्तान - 36 द्वारा Sonam Brijwasi 363 (रात का वक़्त। आसमान में हल्के बादल हैं, पर उनमें से चाँद की एक हल्की सी झलक दिखती है।सिया बालकनी में है — सजी धजी लाल साड़ी में , ... चांद तुम्हे मुबारक - 3 द्वारा Chetan Malade 174 वह एक मुलाकातपिछले अध्याय में हमने देखा कि जब मैं कॉलेज (MCC) पहुँचा... उस दृश्य का वर्णन मैं कुछ इस तरह से करना चाहता हूँ, जिससे मुझे एक असीम ... घुँघरू - 3 द्वारा Shree Kriti 255 वो रात एक आम रात जैसी ही थी, हम दोनों पार्टी से वापस लौट रहे ... मैं शर्लिन को उसके घर वापस ड्रॉप करने जा रही थी। मेरे बीएमडब्लू ... Hidden Contract Marriage - 2 द्वारा Avantika 525 अब आगे ,सिया और सुहानी ने सांझ को ले जाकर मंडप में बैठा दिया । पंडित जी ने शादी के मंत्र पढ़ने शुरू कर दिए। सांझ चेहरे पे बिना ... सावन द्वारा Rakesh Kumar Sharma 213 सावन की दोपहर लगभग आधी खत्म हो चुकी थी और ढलते सूरज की सुन्हरी रोशनी से नीम की काली छाया और लम्बी हो चली थी। इसी नीम की छाया ... मिस फाइटर प्लेन - 5 द्वारा antima 402 ईशानी : हा मेरी मां पढ़ लेंगे।नैना मुस्कराने लगी ईशानी की मुलाकात नैना से कॉलेज के पहले ही दिन हो गई थी फिर क्या बातों - बातों में जान पहचान ... कंधों पर आसमान द्वारा Mayur Chaudhary (11) 417 उस दिन घर का आंगन लोगों से भरा हुआ था, लेकिन बाईस साल के कबीर की दुनिया पूरी तरह वीरान हो चुकी थी। उसके पिता, राघवजी, महज उनचास साल ... एक आम सी प्रेम कहानी - 14 द्वारा Anamika 396 एक आम सी प्रेम कहानी भाग - १४लेखिका "अनामिका" जैसे ही मलय ने सगाई की बात रखी, कमरे में अचानक सन्नाटा छा गया। मलय और निहारिका के माता-पिता चुपचाप ... RAJPUTANA - The War of Love and Revenge - 15 द्वारा Aarushi Singh Rajput 183 "हम अपनी मर्यादा नहीं लाँघ सकते।"वहीं यशी ने अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं। मगर कुछ समय बाद, जब उन्हें एहसास हुआ कि युवराज ने अभी तक उन्हें हाथ ... हुक्म और हसरत - 24 द्वारा Diksha mis kahani 219 हुक्म और हसरत #Arsia"अब आगे…”"मैंने वो निशान... तुम्हारे बहुत करीब वाले इंसान के हाथ पर देखा था।" सिया की बात सुनकर अर्जुन कुछ पल के लिए बिल्कुल शांत रह ... एक आम सी प्रेम कहानी - 1-2 द्वारा Anamika (2.6k) 6.5k एक आम सी प्रेम कहानी भाग- १लेखिका "अनामिका"लेखिका की ओर सेअक्सर ऐसा होता हे की हमे बचपन से हि दिखाया या अहसास कराया जाता हे के प्रेम कहानिया बस ... पिंकू की परी - 2 द्वारा Deepak Kumar Tiwari 627 तरबूज के बीज और बनारसी थप्पड़'सर्रर्र... भूंऊऊऊ...' की अजीब सी आवाजें पिंकू पांडे के कानों में लगातार गूँज रही थीं। पीठ के नीचे की हड्डी में थोड़ी ठंडक का ... बौना जिन्न द्वारा Deepak Kumar Tiwari (19) 1k बौना जिन्नअध्याय 1: मिट्टी का पुराना चिराग और एक अजीब मेहमानगाँव के एक छोटे से और पुराने घर में संजना अपनी बीमार माँ के साथ रहती थी। संजना बहुत ... DASTAN-E-KARB - भ्रम से परे क्या है? - Chapter 1 Scene 1 द्वारा Azoorey 417 "क्या है जिंदगी हक़िक़त या छलावा या कोई भ्रम? इतनी मुद्दत की जिंदगी जिसे हम हक़िक़त समझते रहे क्या वो छलावा थी, क्या सबकुछ सिर्फ एक भ्रम था? क्या ... पिछले जन्मों का.... द्वारा Saroj Prajapati 6.8k संडे की दोपहर । प्रमोद जी एक रिश्तेदार आपके यहां जाने के लिए मेट्रो में चढ़े। अमूमन हर समय खचाखच भरी रहने वाली मेट्रो आज संडे का दिन और दोपहर ... अधूरापन - 14 द्वारा Falguni Dost 450 अध्याय - १४शोभाबहन अपने पति की आंखों का गुस्सा देखकर पूरी तरह सन्न रह गईं। इतने सालों में रमेशभाई ने कभी गुस्से में पलटकर जवाब तक नहीं दिया था, ... हैरानी - Ateet ki Yaadein - 1 द्वारा vishnupriya pandit (1.3k) 6.6k Episode -1 (लंबी रात खत्म हुई और एक अनकहा चेहरा) अस्पताल के उस वीरान कमरे में चारों ओर सफेद दीवारों का सन्नाटा पसरा हुआ था। केवल मशीनों की 'बीप-बीप' की ... वो लड़की जो याद नहीं थी - 1 द्वारा priyanshi bhuva 3.2k वो लड़की जो याद नहीं थीएक रहस्य, एक अधूरी याद, एक प्रेम कहानी और एक ऐसा सच जो सब बदल देगाभाग 1 — एक तस्वीर का राज़अनाया को किताबों ... राखी का वह छोटा-सा डिब्बा द्वारा kantilal Rathod Badamiya 550 राखी का वह छोटा-सा डिब्बा कभी-कभी रिश्ते गरीबी और अमीरी से नहीं टूटते…उन्हें तोड़ देती है हमारी सोच।एक भाई था, जो बचपन में अपनी छोटी बहन के लिए जान ... लघुकथा आध्यात्मिक कथा फिक्शन कहानी प्रेरक कथा क्लासिक कहानियां बाल कथाएँ हास्य कथाएं पत्रिका कविता यात्रा विशेष महिला विशेष नाटक प्रेम कथाएँ जासूसी कहानी सामाजिक कहानियां रोमांचक कहानियाँ मानवीय विज्ञान मनोविज्ञान स्वास्थ्य जीवनी पकाने की विधि पत्र डरावनी कहानी फिल्म समीक्षा पौराणिक कथा पुस्तक समीक्षाएं थ्रिलर कल्पित-विज्ञान व्यापार खेल जानवरों ज्योतिष शास्त्र विज्ञान कुछ भी क्राइम कहानी रिश्तों का बाजार द्वारा Vandna Sharma 381 रिश्तों का बाज़ारसुमन मुंबई से दो दिन के थका देने वाले सफर के बाद अपने मायके चांदपुर पहुंची थी। पूरा रास्ता उसके दिल में एक ही अरमान था। भाभी ... रावण: खलनायकी से परे - शक्ति, अहंकार और सत्ता का पतन द्वारा Sachin yadav (80) 2.1k लेखक: सचिन यादव सह-लेखक / अतिथि लेखिका: स्नेहा साहू परिचय रावण विश्व पौराणिक कथाओं के सबसे बहस योग्य पात्रों में से एक है। रामायण के लोकप्रिय वर्णनों में अक्सर ... एक डॉक्टर और अरबपति - भाग 1 द्वारा shimbha Verma 714 ---*डॉक्टर और सीईओ - भाग 1: पहली भेंट*मुंबई के सबसे बड़े निजी अस्पताल, लाइफकेयर मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल की सातवीं मंजिल पर स्थित केबिन नंबर 704 में डॉ. अनन्या शर्मा अपने ... आई स्टिल लव यू - 11 द्वारा Vartika reena 2.2k -------------रुद्रिका की धड़कनें इस कदर तेज़ हो चुकी थीं कि उसे डर था कहीं उसकी आवाज़ रौक्षिण तक न पहुँच जाए। वह रौक्षिण रायदित, जो कल तक एक शर्मीला, ... राखी सिर्फ धागा नहीं होती द्वारा Nisha Choudhary 429 सावन की रिमझिम फहारों के बीच जब बाज़ार रंग-बिरंगी राखियों से सजे थे, तब राघव अपनी किताबों की अलमारी के सबसे निचले दराज में एक पुरानी लकड़ी की डिब्बी ... कुर्सी द्वारा Madhavi Tripathi 435 “कुर्सी बदलते देर नहीं लगती, लेकिन इंसान की पहचान उसके व्यवहार से होती है।”समय बड़ी खामोशी से यह बदल देता है कि हम कहाँ बैठे हैं।कुछ साल पहले मैं ...