श्रेष्ठ हिंदी कहानियाँ पढ़ें और PDF में डाउनलोड करें होम कहानियां ट्रेन्डिंग हो रहे हैं फ़िल्टर: श्रेष्ठ हिंदी कहानियां मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 3 द्वारा kajal jha 2.2k देवगढ़ का आखिरी हॉल्टसमीर को पुरानी जगहों और अनसुलझे रहस्यों का शौक था। वह एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म मेकर था, जिसका मानना था कि 'भूत' जैसी कोई चीज नहीं होती, ... आरज़ू - अ सागा ऑफ लव एंड डिजायर - 1 द्वारा Priya Shaw 255 Disclaimer यह उपन्यास पूरी तरह कल्पना पर आधारित है और केवल कहानी व मनोरंजन के उद्देश्य ... अधुरा वादा एक साया - एपिसोड 19 द्वारा kajal jha एपिसोड 19: चंद्रमा का नीला सरायपटना के घने जंगल में सूर्यास्त हो रहा था। हवा में इशान की ऊर्जा की हल्की गर्माहट बाकी थी। माया घुटनों पर बैठी, नीरा ... इंसानियत द्वारा Rinki Singh 108 जून का महीना था, बेतहाशा गर्मी, चिलचिलाती धूप, सूर्य देव का प्रकोप अपने चरम पर था, जैसे सबकुछ जला देने को आतुर हों |मैं बच्चों को स्कूल से घर ... लाल दाग़ - 5 - (अंतिम भाग) द्वारा ARTI MEENA 168 सुबह हुई और रोज़ की तरह माया स्कूल गई — जैसे वह हर दिन जाती थी।लेकिन आज उसके मन में एक अलग सोच थी।उसे लग रहा था कि अब ... मशीन का दिल - 2 द्वारा shishi 243 शीशी अब उलझन में थी कि वह रिज़ा की सुने या सक्का की। उसने सोचा कि दोनों की बात सुनने में कोई समझदारी नहीं बल्कि बेवकूफी होगी, क्योंकि वह ... बिल्ली जो इंसान बनती थी - 5 द्वारा Sonam Brijwasi 120 सुबह से ही शानवी का मन भारी था। रात वाले सपने ने उसे अंदर तक हिला दिया था। फिर भी वो खुद को संभालकर ऑफिस चली गई। पूरा दिन…वो ... बिल्ली जो इंसान बनती थी - 4 द्वारा Sonam Brijwasi 738 सुबह की हल्की धूप कमरे में फैल रही थी। खिड़की से आती रोशनी शानवी के चेहरे पर पड़ी…और उसकी नींद टूट गई।लेकिन आज…वो उठते ही चौंक गई। उसका दिल…बिना ... बिल्ली जो इंसान बनती थी - 3 द्वारा Sonam Brijwasi 1.3k सोमवार की सुबह थी। शानवी को ऑफिस जाना था।वो एक इंजीनियर थी — समय की पाबंद और अपने काम में सीरियस। उसने हल्के रंग का सूट-सलवार पहना, बाल ठीक ... स्वर्णा द्वारा Pallavi 96 बारिश की बूँदें स्टेशन की पुरानी छत से टपक रही थीं। प्लेटफॉर्म पर लगी पीली लाइटें गीली ज़मीन पर अजीब सी चमक पैदा कर रही थीं। हवा में ठंडक ... तेरे मेरे दरमियान - 71 द्वारा CHIRANJIT TEWARY 213 आदित्य फोन कट देता है , जानवी को कुछ समझ मे नही आ रहा था के दोनो के बिच विकास के बारे मे क्या बाते हूई , तभी रागिनी ... इंतेक़ाम - भाग 41 द्वारा Mamta Meena 222 निशा अब अधिकतर बीमार रहने लगी थी उसे हमेशा थकान और कमजोरी महसूस होती कभी कभी तो उसे ऐसा लगता है जैसे वह चक्कर खाकर गिर न वाली हो,,,,उसने ... डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 3 द्वारा Jyoti Prajapati 489 दोपहर के डेढ़ बज रहे थे। सड़क पर स्कूल बसों के हॉर्न की आवाज़ें गूँजने लगी थीं। काया ठीक समय पर घर पहुँच चुकी थी। उसने अपनी चप्पलें दरवाजे ... सिंगापुर में फांसी द्वारा Devendra Kumar (13) 357 मेरी बेटी अपर्णा सिंगापुर में कोई बीस वर्ष से रह रही है अतः यहाँ हर वर्ष आना होता रहता है, मेरे देखते देखते यह सुन्दर से और सुन्दर होता ... डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 4 द्वारा Jyoti Prajapati 258 शाम के पांच बज रहे थे। सूरज की सुनहरी किरणें अब नारंगी होकर खिड़कियों से विदा ले रही थीं। घर में एक अजीब सी शांति थी—वह शांति जो किसी ... Maharana Pratap - Chapter 1 द्वारा Aarushi Singh Rajput 336 राजमहल की अंतरकथामेवाड़ के राजमहल का एक शांत कक्ष — ऊँची छतों पर टंगे दीपकों की हल्की लौ में झिलमिलाती परछाइयाँ जैसे इतिहास की परतें खोल रही थीं।रानी जयवंता ... दिल ने जिसे चाहा - 31 द्वारा R B Chavda (12) 336 शादी को दो दिन बीत चुके थे…लेकिन मयूर सर के मन में जैसे कोई बात ठहरी हुई थी…एक ऐसी बात, जो वर्षों से दिल में थी… पर शब्दों तक ... जंगल की गवाही द्वारा devil 396 भाग 1 -टैगलाइन: "जब डर का मजाक उड़ाया गया... डर ने सबक सिखा दिया।"---एक्ट 1 — रोड, फन एंड ह्यूमिलिएशन दृश्य 1: एक्स्टीरियर - शहर की सड़क - दिनविस्तार:सुबह के ... Whisper in The Dark - 9 द्वारा priyanka jha 138 अब आगे।।रिहान ने कॉल पिक किया,हेलो,रिहान ने कहा।सर,आपने जिनके बारे में मुझे पता करने के लिए कहा था,उनके बारे में मुझे ज्यादा नहीं पर इतना पता चला है कि ... लाल दाग़ - 4 द्वारा ARTI MEENA (23) 1.3k मैडम ने अपने बैग में देखा कि अगर उनके पास पैड हो तो वे सुधा को दे दें, लेकिन आज उनके बैग में पैड नहीं था। अब मैडम समझ ... वनमाला द्वारा Aastha Rawat (818) 4.8k एक बार की बात है “एक राजा था, जो अपने साम्राज्य के विशाल जंगल में शिकार पर निकला। जंगल की चुप्प और उसकी रहस्यमयी आवाजें हमेशा उसे आकर्षित करती ... खामोशी का इकरार - CH-2 - कैद द्वारा Dragon Heart 555 छह महीने बाद हरिद्वार सेंट्रल जेल की दीवारें सफेद हैं, लेकिन मुझे हमेशा लगता है कि वो खून के छींटों से सनी हुई हैं। शायद ये मेरे दिमाग का ... खामोशी का इकरार - CH-1 - वो आखिरी रात द्वारा Dragon Heart 1.1k मेरा नाम आरव मल्होत्रा है, और मैं झूठ बोलने में माहिर हूँ। लेकिन जो कहानी मैं आपको सुनाने जा रहा हूँ, वो सच है। हर एक शब्द। हर एक ... ज़ख्मों की शादी - 2 द्वारा Sonam Brijwasi 552 मंडप, सजावट वही – लाल-सुनहरे फूल, सुनहरी रस्में, शहनाई की हल्की धुन।Shristi की आँखों में आशा की झलक आई जैसे ही उसने उस लड़के को देखा। और वो तुरंत ... लघुकथा आध्यात्मिक कथा फिक्शन कहानी प्रेरक कथा क्लासिक कहानियां बाल कथाएँ हास्य कथाएं पत्रिका कविता यात्रा विशेष महिला विशेष नाटक प्रेम कथाएँ जासूसी कहानी सामाजिक कहानियां रोमांचक कहानियाँ मानवीय विज्ञान मनोविज्ञान स्वास्थ्य जीवनी पकाने की विधि पत्र डरावनी कहानी फिल्म समीक्षा पौराणिक कथा पुस्तक समीक्षाएं थ्रिलर कल्पित-विज्ञान व्यापार खेल जानवरों ज्योतिष शास्त्र विज्ञान कुछ भी क्राइम कहानी The Morgue - Part 2 द्वारा fiza saifi 453 अजय सिक्योरिटी रूम में बैठा था। मॉर्ग के कैमरे की स्क्रीन अचानक झिलमिलाई। फिर… तस्वीर साफ हुई। बॉक्स नंबर 7 हिल रहा था। धीरे-धीरे। अंदर से। अजय ने ज़ूम ... शुगर डैडी - जयंती रंगनाथन द्वारा राजीव तनेजा (11) 1.1k ज्यों-ज्यों इन्सान की उम्र बढ़ती जाती है, त्यों-त्यों उसकी अपनों से छोटी उम्र के लोगों के साथ उठने-बैठने, गपियाने, फ्लर्ट करने की इच्छा स्वाभाविक रूप से बलवती होती जाती ... रहे तेरी दुआ मुझ पर - तेरहवां हिस्सा द्वारा MASHAALLHA KHAN 189 {रहे तेरी दुआ मुझ पर - तेरहवां हिस्सा} [फलेशबेक - 3]{सरदार हदाद और कुहेद कबिले का खात्मा}सरदार हदाद उसकी बात सुन हैरान हो गया अब उसका और उसके लोगो का ... Maharana Pratap - Introduction द्वारा Aarushi Singh Rajput (16) 831 एक बड़े मेले के भीड़-भाड़ वाले प्रांगण के भीतर एक विशाल कक्ष सजा हुआ था। वहां बहुत सारे लोग मौजूद थे। सामने, एक सोने-ओसके सिंहासन पर लगभग सोलह–सत्रह वर्ष ... The Morgue - Part 1 द्वारा fiza saifi 1.6k रात के ठीक 2:13 बजे थे। शहर के पुराने सरकारी अस्पताल का पिछला हिस्सा — जहाँ शायद ही कोई जाता हो — अँधेरे में डूबा हुआ था। वहीं था… ... एक जासूसी लेखक की मुकम्मल जिंदगी की दास्तान द्वारा Dr Sandip Awasthi 846 आलोचना : एक जासूसी लेखक की मुकम्मल जिंदगी की दास्तान : आत्मकथा: पानी केरा बुदबुदा __________________________आत्मकथाएं कुछ बुरी होती हैं,कुछ काल्पनिक उपन्यास सी,कुछ झूठ का पुलंदा और कुछ कम ...