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    Worst Indian Education System
    by Rutvik Chothani
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    ईसे जरूर पढिये और थोड़ा समझने की कोशिस कीजिये।Jay hind ,       आज में बात करने वाला हूँ भारतीय एजुकेशन सिस्टम के बारेमे।      तो भारतीय एजुकेशन सिस्टम कुछ बनाही इस ...

    बहुत सारा प्यार
    by Roopanjali singh parmar
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    ❤❤तुमसे पहले कभी किसी इतने छोटे बच्चे को गोद में नहीं लिया था। इसलिए जब पहली बार तुमसे मिलने आ रहे थे तो डर था, तुम्हें गोद में कैसे ...

    ज्ञान(सम्पन्नता,सफलता एंव समृद्धता)
    by Anuradha Jain
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     ज्ञान हर इंसान के लिए बहुत ही महत्व पूणॆ होता है। हर एक के लिए यह अत्यन्त ही आवश्यक ही है। इस के बिना इस संसार में रहना एसे ...

    कमीने दोस्त
    by ANKIT J NAKARANI
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    सभी लोग को सिर्फ दो टोपिक मिल गये है एक दोस्त और दूसरा प्यार इसके आलावा कोई कुछ लिखता ही नहीं साला में भी कुछ ऐसा ही लिख रहा ...

    वीकेंड चिट्ठियाँ - 21
    by Divya Prakash Dubey
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    सेवा में, कुमारी डिम्पल, सविनय निवेदन है कि तुम हमें बहुत प्यारी लगती हो। हम ये चिट्ठी अपने ख़ून से लिखकर देना चाहते थे लेकिन क्या करें हम सोचे कहीं तुम ...

    वीकेंड चिट्ठियाँ - 20
    by Divya Prakash Dubey
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    तुम्हें dear लिखूँ या dearest, ये सोचते हुए लेटर पैड के चार कागज़ और रात के 2 घंटे शहीद हो चुके हैं। तुम्हारी पिछली चिट्ठी का जवाब अभी ...

    वीकेंड चिट्ठियाँ - 19
    by Divya Prakash Dubey
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    संडे वाली चिट्ठी‬ ------------------ पिछले हफ्ते पहली किताब( टर्म्स एंड कंडिशन्स अप्लाई) आए हुए 6 साल पूरे हुए। 6 साल पहले ये चिट्ठी सही में लिख कर अमिताभ बच्च्न को पोस्ट ...

    सभी धर्म के ईश्वर को पत्र
    by Rishi Agarwal
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    परम् आदरणीय प्रभु,आप तो जानते ही है अब इस युग में आपका सर्वस्व धीरे-धीरे नष्ट होता जा रहा है और हो भी क्यों नहीं, जब इंसान स्वयं को खुदा ...

    वीकेंड चिट्ठियाँ - 18
    by Divya Prakash Dubey
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    डीयर बीवी, मैं इंटरनेट पर हर हफ्ते में इतने ओपेन लेटर पढ़ता हूँ और ये देखकर बड़ा हैरान होता हूँ कि कभी किसी पति ने अपनी बीवी को कोई ...

    वीकेंड चिट्ठियाँ - 17
    by Divya Prakash Dubey
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    संडे वाली चिट्ठी‬ ------------------ Dear पापा जी, कुछ दिन पहले आपकी चिट्ठी मिली थी। आपकी चिट्ठी मैं केवल एक बार पढ़ पाया। एक बार के बाद कई बार मन किया कि ...

    वीकेंड चिट्ठियाँ - 16
    by Divya Prakash Dubey
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    डियर J, मुझे ये बिलकुल सही से पता है कि मैं अपने हर रिश्ते से चाहता क्या हूँ। मुझे क्या हम सभी को शायद ये बात हमेशा से सही से ...

    वीकेंड चिट्ठियाँ - 15
    by Divya Prakash Dubey
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    बाक़ी सब में कितना कुछ समा जाता है न, मौसम, तबीयत, नुक्कड़, शहर, घरवाले, पति, ससुराल सबकुछ । उम्मीद तो यही है कि शादी के बाद बदल गयी ...

    वीकेंड चिट्ठियाँ - 14
    by Divya Prakash Dubey
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    सुनो यार पागल आदमी,  तुमसे ही बात कर रहा हूँ, तुम जो सड़क के किनारे फटे कपड़े, बढ़ी हुई दाढ़ी, उलझे बालों के साथ हर मौसम में पड़े रहते हो। ज़ाहिर है ...

    शराबी नहीं शराब खराब
    by manohar chamoli manu
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    शराबी नहीं शराब खराब-मनोहर चमोली ‘मनु’मेरे बेवड़े दोस्त ! कैसे हो? यह पूछने का मन भी कहाँ है? भारी मन से तुम्हें यह पत्र लिख रहा हूँ। कैसे लिखूँ ...

    वीकेंड चिट्ठियाँ - 13
    by Divya Prakash Dubey
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    चिट्ठियाँ लिखने का एक फ़ायदा ये है कि आपको लौट कर बहुत सी चिट्ठियाँ वापिस मिल जाती हैं। इधर एक चिट्ठी ऐसी आई जिसमें किसी ने मुझसे पूछा कि ...