मन की बात Jayti menaria द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

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मन की बात

मन की बात

हमेषा ऐसा क्यों होता हैं कि हम अपने मन की सच्ची बात किसी को कह नहीं पाते हैं। खासकर जिससे हमें कहना चाहिए जिसकी वजह से हम परेषान रहते हैं। मन में दुःखी रहते हैं अन्दर ही अन्दर घुटते रहते है। अगर हम हिम्मत करके उसे कह दे कि उसकी किस बात से हम परेषान हैं तो शायद हम इतना परेषान नहीं हो पर हिम्मत नहीं होती हैं, ऐसा लगता हैं कि मन की बात बोलने से कंही रिष्ते न बिखर जाए। रिष्तों को बिखरने से बचाने के खतिर हम मन की बात मन में ही रखते हैं और सहते रहते हैं। ऐसे लोगों में आत्मविष्वास की कमी होती हैं। एक बार अगर उनमें आत्मविष्वास आ जाए तो हम दूनिया जीत सकते है। बस बात हैं आत्मविष्वास और हिम्म्त की। ऐसी ही एक कहानी हैं रोषनी की।

रोषनी एक एसी लड़की हैं जिसमें आत्मविष्वास की कमी होती है और बस खुद ही में गुम रहती हैं। उसका नाम तो रोषनी होता हैं लेकिन वो उसके नाम के मलतब से बिल्कुल अलग होती है बुझी-बुझी सी रहती हैं। किसी से कुछ कह नहीं पाती है घबराई हुई रहती है तो कुछ उसे जैसे कहता है वो वैसे की रहती है। अपनी इच्छा से जीना तो उसे आता ही नहीं हैं। इसी वजह से लोग उससे दूर ही रहते थे। कोई उसका सच्चा दोस्त नहीं होता है। कोई भी उसके पास ज्यादा देर बैठना पसंद नहीं करता इस वजह से वो बहुत दूःखी रहती थी कि उसका कोई दोस्त नहीं है बस खुद से ही बातें करती रहती थी। वो खुद में खोई रहने वाली आँखों में डर लिए सहमी सी रहती थी। लेकिन उसके मन में कुछ कर दिखाने का जज्बा था।

वो अपने माता-पिता से बहुत प्यार करती थी। उसका एक भाई भी था जो बहुत खुष मिजाज का था उसे डांस का बहुत शौक था। वैसे डांस का तो रोषनी को भी बहुत शौक था। कुछ अच्छा नाच भी लेती थी वो अपने भाई के साथ और मम्मी पापा के बीच तो खुष रहती लेकिन घर से बाहर निकलते ही घबरा जाती थी। वो अपने मम्मी पापा के लिए कुछ करना चाहती थी। बचपन से ही ऐसा मौका तलाषती जिससे उसके मम्मी पापा उससे खुष हो जाए लेकिन वो हर बार नाकामयाब रहती उसके मम्मी पापा उसे समझाते कि बेटा हम तुझसे बहुत खुष है तु क्यों परेषान रहती हैं? वो कहती कि मम्मी पापा में आप लोगों के लिए कुछ ऐसा करना चाहती हुँ जिससे आपको मुझ पर गर्व हो वो अपने मम्मी पापा का नाम रोषन करना चाहती थी। समय बितता गया वो प्रयास करती गई पर संतुष्ट मंजिल हासिल नहीं हो पाई। वो हमेषा असंतुष्ट रहती और प्रयास करती रहती थी।

एक दिन उसे एक ऐसा सच्चा दोस्त मिला जिसने उसकी जिन्दगी बदल दी। उस लड़के का नाम साहिल था। साहिल बहुत खुष रहने वाला जिन्दगी को पुरी तरह से जीने वाला था। वो किसी भी परिस्थिति में अपने आपको खुष रखने की कोषिष करता था। रोषनी को लिखने का बड़ा शौक था। वो जो भी सोचती अपनी डायरी में लिख लेती कभी-कभी कहानी भी लिखती, कभी पंक्तियाँ तो कभी कविताऐं भी लिखती। सूना है जो लोग कुछ बोलकर अपनी मन की बात नहीं समझा पाते वो लिख लेते है वो उन्हीं लोगों में से थी। वो मन की बात को लिख लेती थी उसके लिखने का अंदाज बहुत निराला था। वो आम भाषा में ही लिखती थी। साहिल उसके घर का पड़ौसी अभी-अभी रहने आया था। एक दिन किसी काम से साहिल रोषनी के घर गया काम पूरा होते ही वो निकलने लगा तो रोषनी को घर से जाते हुए उसने देखा। साहिल ने बात करनी चाही लेकिन रोषनी ने उससे बात नहीं की और निकल गई, लेकिन रोषनी के बैग से उसकी डायरी घिर गई जो वो हमेषा अपने पास रखती थी। उसने रोषनी को रोकना चाहा लकिन रोषनी निकल गई। उसे पता भी नहीं चला कि उसकी प्रिय डायरी अब साहिल के हाथ लग चुकी है। साहिल ने उस डायरी को खोलकर पढ़ा तो पढ़ता ही चला गया। वो रूक ना सका, पढ़ते-पढ़ते पुरी डायरी पढ़ ली। साहिल ने सोचा कितना अच्छा लिखा हैं। वो अपने मन में कितनी बातें दबाए हुई है। मुझे उससे बात करन चाहिए। साहिल नेवो डायरी वहीं छोड़ दी। उसका मन रोषनी से मिलने के लिए बेताब हो रहा था। जब रोषनी सायं को घर आई तो साहिल उससे मिलने चला गया। साहिल को देखकर रोषनी घबरा गई। साहिल ने कहा घबराओं मत मैंने तुम्हारी डायरी पढ़ ली है उसे पढ़कर मुझे तुमसे मिलने की इच्छा हुई तो मिलने आ गया। तुम्हारा नाम क्या हैं? वो कुछ ना बोली, फिर साहिल ने कहा मेरा नाम साहिल हैं। मैं तुम्हारा पड़ौसी हूं। मैं कुछ काम से तुम्हारे घर पर आया था तो यह डायरी जमीन पर पड़ी मिली तो मैंने पढ़ ली। साॅरी लेकिन तुम्हारे मन में इतनी बातें दबी हुई हैं तुम किसी से कुछ कहती क्यों नहीं। तुम किस चीज से डरती हो। मुझे बताओं मुझे अपना दोस्त समझो। मैं तुमसे दोस्ती करने आया हूँ। तभी रोषनी ने थोड़ी देर बाद साहिल से कहा तुम पहले ऐसे लड़के हो जिसने मुझसे इस तरह से बात की। मेरा कोई दोस्त नहीं हैं। मैं घबराहट के कारण दोस्त नहीं बना पाती पर तुमसे मिलकर अच्छा लगा। मेरा नाम रोषनी है। साहिल चैंक कर बोला कि रोषनी अरे! वाह इतना अच्छा नाम हैं। तुम अपने नाम से बिल्कुल अलग हो। तुम कितनी बुझी-बुझी सी रहती हो। आज से हम दोनो दोस्त होगें। अबसे तुम्हारे मन में जो भी बात आए मुझसे कहोगी ना? रोषनी सोच समझकर कहती है हाँ कहुंगी। ऐसे ही समय बितता है और इनकी दोस्ती गहरी होती जाती है। वो साहिल की बातों से प्रभावित होती है। साहिल रोषनी को हिम्मत देता है। उसे दूनिया का सामना करना सिखाता हैं। अपनी जिन्दगी को खुषी से जीना सिखाता है।

एक दिन साहिल कहता है तुम अपनी डायरी की कहानीयाँ क्यों नहीं छपवाती हो? तुम कितनी अच्छी कविता, पंक्तियाँ एवं कहानीया लिखती हो। तुम में तो अच्छा हुनर है उसे दिखाती क्यों नहीं हो? रोषनी कहती है कि मैं डरती हूँ कंही किसी को पसंद नहीं आयी तो? साहिल हंसकर कहता हैं कि घबराओं मत मैं हूँ ना तुम्हारे साथ। मुझे बेहद अच्छी लगी तुम्हारी कविताएं और कहानी तो दुसरों को भी जरूर पसंद आयेगी। अगर नहीं पसंद नहीं आयी तो क्या हूआ और अच्छा लिखना। सभी में कुछ ना कुछ कमीयाँ तो होती ही हैं। कोई भी पुरी तरह से सही नहीं होता है। यह बात सुनकर रोषनी में बदलाव आता है। उसमें हिम्मत जागती है और वह अपनी कहानीयाँ छपवाने देती है तो उसकीे कहानीयाँ ज्यादातर लोगों को पसंद आती हैं। अच्छा रेस्पोंस देखकर रोषनी में आत्मविष्वास जागता हैं। उसमें लिखने की और इच्छा जाग्रत होती हैं। साहिल को यह सब देखकर खुषी होती हैं वह रोषनी को और होंसला देता हैं और कहता हैं मैंने कहा था ना! कि सब अच्छा होगा तुम हिम्मत तो करों। यह सब सुनकर रोषनी खुष होती है और समय के साथ उसकी कविता व कहानी को ज्यादा से ज्यादा लोग पसंद करने लगे और उससे सम्पर्क करने लगे। उसकी तारिफ करने लगे और नये दोस्त बनने लगे। इसी हौसंले के साथ वह एक किताब लिखती हैं और उसके नाम से छपती है। वह किताब बाजार में धूम मचा देती है लोग बहुत रूची लेने लगे। इसी तरह सबसे ज्यादा बिकने वाली उसकी ही किताब की वजह से उसके लिए एक सम्मान समारोह रखा जाता है और उसका वहाँ सम्मान किया जाता है। उसे दो शब्द कहने के लिए स्टेज पर बुलाया जाता है वह कहती है कि मैं बदल गयी हूँ ऐसी नहीं थी पहले और मैं डरी-डरी रहती थी पहले लेकिन मेरी जिन्दगी में कोई आया उसने मुझमे हिम्मत जगाई और मैं यहाँ तक पहूँची हूँ। मैं हमेषा से अपने मम्मी पापा का नाम रोषन करना चाहती थी। आज वो मेरा सपना पुरा हुआ और यह सब मेरे एक सच्चे दोस्त साहिल की वजह से सम्भव हुआ। पहले मुझसे कोई बात तक नहीं करना चाहता था और आज मुझसे सब दोस्ती करना चाहते है। मैं आज बहुत खुष हूँ।

ऐसा एक सच्चा दोस्त सब के पास होना चाहिए। तब जिन्दगी खुषनुमा हो जायेगी।