पहली पहेली और बंद कमरा Avinash द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

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पहली पहेली और बंद कमरा

दरवाज़ा खुलने के बाद ठंडी हवा का एक झोंका कमरे में दाखिल हुआ, जिससे मेज़ पर रखी मोमबत्तियाँ टिमटिमाने लगीं। राजन और गीतिका ने सावधानी से अंदर कदम रखा। कमरे के केंद्र में रखी वह पुरानी लोहे की तिजोरी किसी डरावने साए की तरह खड़ी थी। तिजोरी के चारों ओर जमी धूल और उस पर पड़े मकड़ी के जाले इस बात की गवाही दे रहे थे कि यहाँ दशकों से किसी ने कदम नहीं रखा था।
गीतिका ने अपने बैग से टॉर्च निकाली और उसकी रोशनी तिजोरी पर डाली। "राजन, देखो! तिजोरी पर कोई साधारण ताला नहीं है, बल्कि इसमें एक डिजिटल स्क्रीन और चार अंकों का नया पासवर्ड डालने का विकल्प है। और बगल में पड़ी वह डायरी... यह सब उस फ़ैंटम की कोई चाल तो नहीं?"
राजन ने आगे बढ़कर उस पुरानी चमड़े की जिल्द वाली डायरी को उठाया। उसके पन्ने पीले पड़ चुके थे, और स्याही जगह-जगह से फैल चुकी थी। राजन ने कांपते हाथों से डायरी का पहला पन्ना पलटा।
"यह... यह तो मेरी बहन अनघा की लिखावट है!" राजन की आवाज़ भर्रा गई।
डायरी के पन्नों पर अनघा के आखिरी दिनों का खौफ साफ झलक रहा था। उसने लिखा था:
"अगर तुम यह पढ़ रहे हो, तो इसका मतलब है कि मैं अब इस दुनिया में नहीं हूँ। वह फ़ैंटम कोई और नहीं, बल्कि हमारे ही करीब का कोई शख्स है जो उस गुप्त दस्तावेज़ की तलाश में है। वह दस्तावेज़ इस हवेली के इतिहास और उस काले सच से जुड़ा है जिसे मेरे पिता ने दफना दिया था। तिजोरी के अंदर एक पेन ड्राइव और एक नक्शा है, लेकिन सावधान रहना... यहाँ तक पहुँचने वाला हर शख्स दोस्त नहीं होता।"

गीतिका ने चौंककर राजन की तरफ देखा। "अनघा का यह कहना कि 'हमारे करीब का कोई शख्स'... इसका क्या मतलब हुआ? क्या हवेली में हमारे अलावा भी कोई है?"
इससे पहले कि राजन कुछ जवाब देता, हॉल से एक अजीब सी खड़खड़ाहट की आवाज़ आई—मानो कोई भारी कोट पहने व्यक्ति सीढ़ियाँ चढ़ रहा हो। कमरे की हवा अचानक भारी हो गई। घड़ी की टिक-टिक की आवाज़ अब और भी डरावनी लग रही थी, मानो वक्त बहुत तेज़ी से उनके हाथों से फिसल रहा हो।
"हमारे पास सिर्फ 60 मिनट बचे हैं," गीतिका ने घड़ी की तरफ देखते हुए कहा। "हमें इस तिजोरी को खोलना ही होगा। डायरी में क्या कोई सुराग है?"

राजन ने डायरी के पन्ने तेजी से पलटना शुरू किए। बीच के पन्नों पर कुछ तारीखें और गणितीय समीकरण लिखे थे। आखिरी पन्ने पर एक कवितानुमा पहेली दर्ज थी:
“वक्त की सुई जब पीछे मुड़ी,
तभी तो सच्चाई सामने आई।
शुरुआत जीरो से थी, अंत चार पर था,
बीच में छिपे थे वो राज, जो अनघा ने छुपाए थे।”
राजन का दिमाग तेज़ी से दौड़ा। "गीतिका, याद करो जब हमने दरवाज़े का लॉक खोला था! वहां पेंडुलम के पीछे '0-6-4-2' लिखा था। लेकिन अनघा की इस डायरी में अंत 'चार' पर होने की बात कही गई है। अगर हम इस क्रम को समझें..."
गीतिका ने तुरंत सिर हिलाया। "हाँ! दरवाज़े का कोड 0-6-4-2 था। लेकिन तिजोरी का पासवर्ड शायद उसी पहेली का अगला चरण है। '4 में 8 जोड़ो, जो मिले उसे आधा करो'—यानी 6। और शुरुआत शून्य से। अगर हम उन अंकों को मिलाएँ जो इस कमरे की हर चीज़ से जुड़े हैं..."

तभी कमरे की बत्तियाँ और तेज टिमटिमाने लगीं। अचानक, कमरे के कोने में रखे एक पुराने आईने में किसी की परछाईं दिखाई दी। एक लंबा, काला कोट पहना हुआ नकाबपोश शख्स दरवाज़े की ओट में खड़ा था। उसके चेहरे पर एक खौफनाक मुखौटा था, जिसकी आँखें अंधेरे में चमक रही थीं।
"कौन हो तुम?" राजन चिल्लाया और तिजोरी से दूर हट गया।
नकाबपोश ने कोई आवाज़ नहीं निकाली, बस उसने धीरे से ताली बजाई। एक विद्रूप हंसी कमरे में गूंज उठी। "शाबाश, राजन और गीतिका! तुम दोनों यहाँ तक पहुँच तो गए, लेकिन यह खेल सिर्फ एक शुरुआत है। उस दस्तावेज़ तक पहुँचने के लिए तुम्हें अपनी वफादारी की कीमत चुकानी होगी।"
"फेंटम!" गीतिका ने अपनी जेब से पिस्तौल निकालते हुए कहा। "सामने आओ और मुकाबला करो!"

लेकिन नकाबपोश ने पलक झपकते ही कमरे के एक गुप्त दरवाजे की तरफ छलांग लगाई और गायब हो गया। दरवाज़ा बंद होने से पहले वहाँ हवा में एक कागज का टुकड़ा उड़कर गिरा।
राजन ने दौड़कर वह कागज़ उठाया। उस पर लिखा था:
"दूसरी पहेली उस कमरे में है जहाँ आग और पानी मिलते हैं। अगर गलत पासवर्ड डाला, तो तिजोरी हमेशा के लिए लॉक हो जाएगी।"
राजन ने सांस रोकी और तिजोरी की स्क्रीन पर देखा। वहाँ पासवर्ड डालने के लिए केवल तीन प्रयास बचे थे। उसने डायरी, अनघा के आखिरी शब्द और उस नकाबपोश की चेतावनी को आपस में जोड़ा।
"गीतिका, अनघा ने डायरी में लिखा था कि तिजोरी का असली पासवर्ड वह तारीख है जब सब कुछ बदला था... उसकी डायरी के पहले पन्ने पर कौन सी तारीख है?"
गीतिका ने डायरी के पन्ने पलटकर देखा। कोने में लिखा था: 12-06-2024 (यानी 12 जून)।

"और पेंडुलम के पीछे का कोड 0642 था," राजन ने कहा। "चलो इसे मिलाकर देखते हैं: 1-2-0-6 या 0-6-4-2?"
तिजोरी की स्क्रीन पर टिक-टिक करती लाल बत्ती जल रही थी। दोनों की धड़कनें तेज हो गईं।
क्या राजन और गीतिका सही पासवर्ड चुन पाएंगे? और क्या वे उस नकाबपोश के धोखे से बचकर 'आग और पानी' वाले कमरे तक पहुँच पाएंगे?
जानने के लिए पढ़िए भाग 3