Hum Tum एक दूजे के यूं हुए Deepshikha Kedia द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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Hum Tum एक दूजे के यूं हुए


दार्जिलिंग की वह सुबह किसी डरावने सपने से कम नहीं थी।ठंड इतनी बेरहम थी कि साँस लेते ही फेफड़ों में बर्फ़ चुभने लगती। चारों ओर फैली धुंध किसी शिकारी की तरह पूरी वादी को निगल चुकी थी इतनी घनी कि दो कदम आगे भी कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। पेड़ों से टकराती ठंडी हवाएँ किसी अदृश्य चीख़ की तरह सिसक रही थीं, मानो पहाड़ खुद किसी अनहोनी की गवाही देने वाले हों।सुनसान सड़कों पर मौत-सी ख़ामोशी पसरी थी।सुबह के ठीक 4 बज रहे थे।तभी उस सन्नाटे को चीरती हुई एक तेज़ कार की गड़गड़ाहट गूंजी। हेडलाइट्स की पीली रोशनी धुंध को चीरने की नाकाम कोशिश कर रही थी, जबकि कार बिजली की रफ़्तार से खतरनाक पहाड़ी मोड़ों पर फिसलती चली जा रही थी। हर मोड़ के साथ टायरों की चीख़ और इंजन की दहाड़ माहौल को और भयावह बना रही थी।अचानकएक तीखा मोड़ आया।कार के पहिए बेकाबू हो गए।रबर के घिसटने की जलती हुई आवाज़ गूंजा कsssshhh…!स्टेयरिंग व्हील झटके से घूम गया, और अगले ही पल समय मानो थम-सा गया।धड़ाम!कार पूरी ताक़त से सड़क किनारे खड़े एक पुराने, विशाल पेड़ से जा टकराई। टक्कर इतनी ज़ोरदार थी कि शीशे चकनाचूर होकर धुंध में बिखर गए। चारों तरफ़ धुएँ और टूटे लोहे की गंध फैल गई।गाड़ी के भीतर, लगभग 26–28 साल का एक युवक था।  ।कोहरे की मद्धम रोशनी में भी उसके नैन-नक्श किसी राजकुमार जैसे कोमल और ख़ूबसूरत दिख रहे थे तेज़ जॉ-लाइन, सुलझे हुए बाल और चेहरे पर एक शाही सादगी।लेकिन इस वक़्त…उस शाही चेहरे पर बेचैनी और दर्द की लकीरें उभर आई थीं।टक्कर के झटके से उसका सिर पूरी शिद्दत के साथ स्टीयरिंग व्हील से जा भिड़ा।एक भयानक आवाज़ के साथ उसके माथे से खून फूट पड़ा।  आँखों के सामने अंधेरा छा गया… साँसें लड़खड़ाईं… और फिरसब कुछ शांत।

कुछ घंटों बाद, सूरज की हल्की किरणों के साथ कोहरा थोड़ा-थोड़ा छंटने लगा।उसी वक़्त, कुछ राहगीरों की नज़र उस मुड़ी-तुड़ी, पेड़ से चिपकी कार पर पड़ी। पहले तो वे ठिठके… फिर किसी अनहोनी के डर से दौड़ते हुए वहाँ पहुँचे।किसी ने पुलिस को फोन किया, तो किसी ने हिम्मत जुटाकर कार का दरवाज़ा खोलने की कोशिश की।लोहे का दरवाज़ा अटका हुआ था।कई हाथ लगे…तब जाकर चर्र्राक ! दरवाज़ा खुला।युवक को बड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया।उसका शरीर ठंड से अकड़ चुका था, होंठ नीले पड़ चुके थे। किसी ने पास की बोतल से उसके चेहरे पर ठंडे पानी के छींटे मारे।एक पल…दो पल…फिर उसकी पलकों में हल्की-सी हरकत हुई।उसने धीरे-धीरे आँखें खोलीं।पर उन आँखों में होश नहीं था…न पहचान…न डर…बस एक अजीब-सा खालीपन, जैसे सब कुछ कहीं पीछे छूट गया हो।“बेटा… बेटा, सुन रहे हो?”एक बूढ़ा आदमी उसे सहारा देते हुए बोला,“अपना नाम बताओ? कहाँ से आ रहे हो?”युवक के होंठ कांपे।गला सूखा था।काफी देर बाद, जैसे किसी और की याद उधार लेकर वह बुदबुदाया“मैं… मैं… मान ओबेरॉय।”इतना सुनते ही लोग एक-दूसरे का मुँह देखने लगे।तभीभीड़ के पीछे से एक आदमी की घबराई हुई आवाज़ गूंजी“अरे! पीछे देखो… पिछली सीट पर… वहाँ एक लड़की भी है!और वो… वो तो दुल्हन के लिबास में है!”भीड़ में सनसनी फैल गई।“दुल्हन?!”मान की आँखें फैल गईं।उसके चेहरे पर अचरज और दहशत एक साथ उभर आए।“क… कौन सी लड़की?”उसकी आवाज़ काँप रही थी।लोगों ने पीछे झाँककर देखा।सच में लाल जोड़े में सजी एक लड़की, भारी कंगन, चूड़ियाँ, माथे पर सिंदूर…लेकिन वह बिल्कुल शांत थी।बेहद शांत…जैसे गहरी नींद में हो।भीड़ में से किसी ने कहा“अरे साहब, आपकी कार में है तो आपकी पत्नी ही होगी न!लगता है शादी करके भागे हो।”यह सुनते ही मान की साँसें बेकाबू हो गईं।उसका सिर चकराने लगा।उसने कांपते हाथों से अपना माथा पकड़ लिया।“न… नहीं…”वह लगभग चीख पड़ा,“पत्नी? मेरी शादी?पर… मेरी तो कोई शादी ही नहीं हुई!

मान लड़खड़ाते क़दमों से कार से उतरा और सीधे पिछली सीट की ओर बढ़ा। जैसे ही उसने खिड़की से अंदर झाँका, उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई।वहाँ…लाल जोड़े में सजी एक लड़की अब भी बेसुध पड़ी थी।उसका चेहरा ऐसा था, जैसे किसी कलाकार ने पत्थर को तराशकर उसमें जान भर दी हो। लंबी घनी पलकों के नीचे बंद आँखें, होंठों पर ठहरी मासूमियत और चेहरे पर अजीब-सी शांति।लेकिन मान के लिए वह कोई परी नहीं थीवह एक चलती-फिरती मुसीबत थी।गाँव वाले लड़की को होश में लाने की कोशिश कर रहे थे कोई पानी के छींटे मार रहा था, तो कोई उसका नाम लेकर पुकार रहा था। तभी मान की घबराई हुई आवाज़ गूँजी“अरे सुनो सब लोग! ये मेरी बीवी नहीं है!मैं नहीं जानता ये लड़की कौन है और मेरी कार में क्या कर रही है!”भीड़ में एक पल की ख़ामोशी छा गई।फिर एक आदमी ने मान को सिर से पैर तक देखा और तंज कसते हुए बोला“वाह भाई साहब!खुद दूल्हे की शेरवानी पहन रखी है, माथे पर तिलक चमक रहा है, बगल में दुल्हन बैठी है…और अब कह रहे हो‘मैं नहीं जानता’?”मान हड़बड़ा कर खुद को देखने लगा।और अगले ही पल…उसकी हालत पतली हो गई।वाकईउसके शरीर पर भारी कढ़ाई वाली शेरवानी थी।माथे पर साफ़-साफ़ तिलक लगा हुआ था।“ये… ये कैसे हो सकता है?”उसकी आवाज़ लड़खड़ा गई।उसे साफ़ याद थावह तो सुबह बिज़नेस मीटिंग के लिए गहरे नीले रंग का 3-पीस सूट पहनकर निकला था।फिर ये शेरवानी?ये तिलक?उसका सिर घूमने लगा।क्या वह पागल हो रहा था…या कोई उसके साथ बहुत बड़ा खेल खेल रहा था?तभी एक बूढ़ा आदमी गंभीर आवाज़ में बोला“बेटा, बहू की हालत ठीक नहीं लग रही।इसे अस्पताल ले जाना पड़ेगा।”

मान झुंझला उठा“ले जाओ! जहाँ ले जाना है ले जाओ!लेकिन ये मेरी बीवी नहीं है!मेरी अभी शादी नहीं हुई है, और न ही मेरा ऐसा कोई इरादा है!”

भीड़ में से एक औरत ने कमर पर हाथ रखकर ताना मारा“हूँ! लगता है घरवालों ने ज़बरदस्ती शादी करवा दी है।अब जनाब हाथ झाड़ रहे हैं।पुलिस को बुलाओ! दो डंडे पड़ेंगे तो सारी याददाश्त वापस आ जाएगी।”मान का पारा अचानक चढ़ गया।“डंडे?”उसने ग़ुस्से से कहा,“ऐसे कैसे डंडे मारोगे?मैं कोई सड़कछाप इंसान नहीं हूँ!मैं मान ओबेरॉय हूँ ओबेरॉय ग्रुप का CEO!”गाँव वाले एक-दूसरे का मुँह देखने लगे।फिर एक हट्टे-कट्टे आदमी ने लाठी आगे बढ़ाते हुए कहा “CEO होगे अपने दफ़्तर में।यहाँ तो तुम पूरे के पूरे भगोड़े दूल्हे लग रहे हो।चलो, इसे और इसकी बीवी को गाँव ले चलते हैं।जब तक मेमसाहब को होश नहीं आता, जनाब यहीं रहेंगे।”मान पीछे हट गया “ये ज़बरदस्ती है!मैं कहीं नहीं जा रहा!और बार-बार इसे मेरी बीवी बोलना बंद करो…वरना मैं तुम सब पर Sue कर दूँगा!”इतना सुनते ही बूढ़ा काका माथा पीट बैठा “हे भगवान!देखो तो कैसा आदमी है!पत्नी को पहचानने से इनकार कर रहा है और कह रहा है हम पर ‘सुसु’ करेगा!छि-छि… घोर कलियुग आ गया है भाई!”मान ने झुंझला कर सिर पकड़ लिया“अरे काका! क्या बोले जा रहे होवो ‘सुसु’ नहीं… Sue!मतलब कोर्ट केस करूँगा!कहाँ की बात कहाँ ले जा रहे हो आप!”लेकिन अब तक बहुत देर हो चुकी थी।चार-पाँच मज़बूत पहाड़ी लोग आगे बढ़े और मान को दबोच लिया।मान चिल्लाता रहा, हाथ-पाँव मारता रहा, लेकिन उनकी मज़बूत पकड़ के आगे उसकी एक न चली।अंत में,मान और वह रहस्यमयी बेहोश दुल्हन दोनों को लेकर लोग गाँव के छोटे से अस्पताल की ओर बढ़ गए।और मान के दिमाग़ में बस एक ही सवाल गूँज रहा थाये सब क्या हो रहा हैं ...ये शेरवानी, ये तिलक और ये दुल्हन…आख़िर आए कहाँ से?