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    टीस .....
    by Jyotsna Kapil
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    जैसे-2 उपन्यास अपने चरम पर पहुंचता जा रहा था दिव्या लेखक के भावों में डूब उतरा रही थी।वह उपन्यास के पात्रों के साथ रो रही थी,हँस रही थी। कहानी ...

    अमर प्रेम - 5
    by Pallavi Saxena
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    ताकि अंजलि गलती से भी वेदेश में बस जाने का न सोच ले। इधर नकुल राहुल के मन कि हालत समझ रहा है। इसलिए वह दीना नाथ जी से ...

    नादान मोहब्बत - नही यह प्यार नही - 1
    by Lakshmi Narayan Panna Verified icon
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    नही यह प्यार नहीभाग-1सोफिया सागर को समझा रही थी । वह कह रही थी -" क्यों इतना नाराज होते हो सागर ? जो तुम समझ रहे हो वैसा कुछ ...

    डॉमनिक की वापसी - 29
    by Vivek Mishra Verified icon
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    पिछले दो तीन दिन से दिल्ली में सर्दी बहुत बढ़ गई थी. अकेले आदमी के लिए इस मौसम की उदास शामें और लम्बी रातें कितनी बोझिल होती हैं यह ...

    वैश्या वृतांत - 26
    by Yashvant Kothari Verified icon
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    अहिंसा और करुणा भारतीय संस्कृति एवं वागंमय के प्रमुख आधार रहे हैं। बिना करुणा के भारतीय चिन्तन धारा का विकास संभव नहीं था। वास्तव में करुणा जीवन का अमृत ...

    फिर भी शेष - 23
    by Raj Kamal Verified icon
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    रितु यानी सुगंधा को स्वस्थ होने में लगभग दो सप्ताह का समय लगा। डॉक्टर ने दो दिन तो घर आकर ही देखा और दवाइयां दीं। जब खास फर्क नहीं ...

    डॉमनिक की वापसी - 28
    by Vivek Mishra Verified icon
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    उस दिन अनंत ने अपने हाथ से चाय बनाकर दोनों को दी. फिर एक चिट्ठियों का पुराना गट्ठर खोल के उन्हें तार से छेदकर, उसमें फसाकर कुंडे से लटकाते ...

    प्रेम दीवानी
    by Saroj Prajapati
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    पूरा सप्ताह काम करने के बाद रविवार हम नौकरीपेशा लोगों के लिए एक ठंडी हवा के झोंके की तरह आ ताजगी भर जाता है । तो मै भी आज ...

    अमर प्रेम - 4
    by Pallavi Saxena
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    हाँ वो उस दिन जब अंजलि से मुलाक़ात हुई तब मेरी भी समझ में नहीं आया कि मुझे उससे क्या पूछना चाहिए क्या नहीं तो मैंने भी बस यही ...

    फिर भी शेष - 22
    by Raj Kamal Verified icon
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    सुखदेव का बड़ा भाई हरदयाल सिंह अपनी योजना के मुताबिक ‘नाप—जोख' कर ‘आगा—पीछा' सोच—समझ कर काम कर रहा था। बरसों पहले उसने विकसित होती नई कॉलोनी में हज़ार वर्ग ...

    डॉमनिक की वापसी - 27
    by Vivek Mishra Verified icon
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    सुबह जब रेबेका की आँख खुली तो उस कमरे की गर्माहट किसी घोंसले सी लगी. मन किया फिर से चादर में दुबक के सो जाए. पर देखा कि दीपांश ...

    उधड़े ज़ख्म - अंतिम पार्ट
    by Junaid Chaudhary Verified icon
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    आख़री ख़तअस स्लामु अलैकुम  मेरे प्यारे बुद्धू सड़क छाप लेखक,मेरे प्यारे जुनैद तुम तो मेरे ऊपर कहानी न लिख पाये,लेकिन मेरा ये आखरी ख़त सिर्फ तुम्हारे लिए है,मुझे नही ...

    अमर प्रेम - 3
    by Pallavi Saxena
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    तभी सहसा काँच के टूटने की आवाज़ से नकुल की तंद्रा टूट जाती है और वह देखता है कि सुधा की वह तस्वीर जिस पर चंदन का हार टंगा ...

    डॉमनिक की वापसी - 26
    by Vivek Mishra Verified icon
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    रेबेका को छोड़कर फ्लैट पर पहुँचते हुए बहुत देर हो गई थी. उस रात वह अकेला होकर भी अकेला नहीं था. वहाँ से लौटकर लग रहा था कोई नाटक देखके ...

    वैश्या वृतांत - 25
    by Yashvant Kothari Verified icon
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    प्राचीन भारतीय दर्शन व संस्कृति में अहिंसा को सर्वोपरि स्थान दिया गया है । जैन धर्म का यह मुख्य सिद्धान्त है । जैन साहित्य में 108 प्रकार की हिंसा ...

    फिर भी शेष - 21
    by Raj Kamal Verified icon
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    नरेंद्र ने तो मोबाइल नंबर देने के लिए ही हिमानी को फोन किया था। यही सोच कर कि कभी इमरजेंसी में मौसी कहां—कहां लैंडलाइन पर फोन पर फोन करके ...

    फरेब - 5
    by Raje.
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     फरेब-५, इससे आगे के भाग आपको अच्छे लगे ‌इस बातकी मुझे बेहद खुशी और आशा करता हु की, यह भाग भी आपको अच्छा लगेगा॥     

    डॉमनिक की वापसी - 25
    by Vivek Mishra Verified icon
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    चलते-चलते दीपांश कुछ सुस्त हो गया था। रेबेका भी थक गई थी। दोनो के चेहरे से लग रहा था कि वह एक दूसरे से कहना चाह रहे हों कि ...

    कल्पना की रोम...
    by Pandit Swayam Prakash Mishra
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    कहते हैं की कोई शायर कल्पनाओं के बिना, एक बेहतर  शायर  नहीं हो सकता   , ठीक वैसे ही जैसे  एहसासो के बिना को एक आशिक  एक अच्छा आशिक नहीं  ...

    अमर प्रेम - 2
    by Pallavi Saxena
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    सुशीला बुआ की बातों को सुनने के बाद मुझे यह एहसास हुआ कि “शायद माँ भी अपनी जगह गलत नहीं है नकुल”, यह दुनिया है ही ऐसी “जो घर ...

    फिर भी शेष - 20
    by Raj Kamal Verified icon
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    फिर भी शेष राज कमल (20) काजल अपनी दुनिया में तल्लीन थी। अब उसके बच्चे बड़े हो गए थे। दोनों लड़कियां डिग्री कॉलेज में और लड़का इंटर कॉलेज में पहुंच गए थे। ...

    डॉमनिक की वापसी - 24
    by Vivek Mishra Verified icon
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    बरसात के दिनों में दिल्ली की सड़कों को तालाब बनते देर नहीं लगती। खास तौर से पुरानी दिल्ली के कुछ इलाक़ों में बारिश बन्द होने के कई घंटों बाद ...

    उधड़े ज़ख़्म - 8
    by Junaid Chaudhary Verified icon
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    अचानक सुम्मी की सांसे तेज़ होने लगी और वो कांपने लगी,घबरा कर मेरी आँख खुली मेने देखा वो परेशानी में मुब्तिला है,मेंने फ़ौरन नर्स को आवाज़ लगाई,नर्स और डॉक्टर ...

    डोर – रिश्तों का बंधन - 11 - अंतिम भाग
    by Ankita Bhargava Verified icon
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    धीरे धीरे वक्त के साथ बहुत कुछ बदला नयना के जीवन में, मां अब पहले से थोड़ी कमज़ोर हो गई थीं और जोड़ों के दर्द से परेशान भी रहने ...

    अमर प्रेम - 1
    by Pallavi Saxena
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    जीवन मरण के बारे में सोचते हुए हमेशा मन उलझ जाता है चारों ओर बस सवाल ही सवाल नज़र आते हैं मगर उत्तर कहीं नज़र नहीं आता। क्या है ...

    नादान मोहब्बत - तितलियों के बीच
    by Lakshmi Narayan Panna Verified icon
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    तितलियों के बीच लखनऊ शहर के बीच में बसे गाँव जुगौली का दूर दूर तक फैला हुआ मैदान मुझे अब भी याद आता है । मैं और मेरे पड़ोस के सभी ...

    डॉमनिक की वापसी - 23
    by Vivek Mishra Verified icon
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    रविवार को ऋषभ का नाम ‘डॉमनिक’ की भूमिका के लिए तय करने से पहले रमाकांत दीपांश से मिले. उससे मिलके वह खाली हाथ पर संतुष्ट लौटे थे. ज्यादा कुछ ...

    वैश्या वृतांत - 24
    by Yashvant Kothari Verified icon
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    ऐसे स्वागत कीजिए जीवन की सांझ का देश में इस समय करोडो लोग ऐसे हैं जिनकी आयु 60 वर्प या उससे अधिक है। बड़े बूढ़ों का इस देश में हमेशा ...

    फिर भी शेष - 19
    by Raj Kamal Verified icon
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    अकेलेपन की उदासी रितु को हमेशा नहीं घेरती। प्रसिद्धि और पैसे का नशा उस पर हावी रहने लगा है। जब कभी उसकी खुमारी टूटती है, तब जीवन बियाबान लगने ...

    डॉमनिक की वापसी - 22
    by Vivek Mishra Verified icon
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    विश्वमोहन दीपांश को उसकी गुस्ताखी पर डांटना चाहते थे. पर उससे मिलने के लिए भीड़ उमड़ी पड़ रही थी. दर्शकों ने उसे घेर लिया था. वे उससे मिलने के लिए ...