हिंदी क्लासिक कहानियां किताबें और कहानियां मुफ्त पीडीएफ

    हड़बड़ी में उगा सूरज
    by Prabodh Kumar Govil
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    हड़बड़ी में उगा सूरजक्रिस्टीना से मेरी पहचान कब से है ? यह एक ऐसा प्रश्न है जिसके बहुत सारे उत्तर हो जाएंगे, और ताज़्जुब मुझे बहुत सारे उत्तर हो ...

    अब लौट चले - 9
    by Deepak Bundela Moulik
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    अब लौट चले -9किसी ज़माने में इस घर में मेरी मर्ज़ी चला करती थी और मनु चुपचाप मेरी ज़िद के आगे झुक जाया करता था. ठीक उसी तरह आज ...

    काश...
    by Saurabh kumar Thakur
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    अक्सर सोचा करता हूँ कि मैं आखिर पढ़ता कब हूँ ।रात को बारह बजे मोबाइल में नेट आता है,सुबह से शाम तीन बजे तक मोबाइल चलाते रहता हूँ ।फिर ...

    अब लौट चले - 8
    by Deepak Bundela Moulik
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    और में फिर हारी हुई सी बेड पर आकर लेट गई थी.. मन में काफ़ी जद्दोजहद थी कभी मन करता के क्यों ना गुम नाम ही हो जाऊं... किसी को ...

    अब लौट चले - 7
    by Deepak Bundela Moulik
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    कुछ देर हम दोनों यूही बैठे रहे.... मै दोषी थी वो निर्दोष था मै सिर झुकाये बैठी थी अभिषेक मुझें देख रहा था... बिलकुल मनु के गुण वही मिज़ाज़ ...

    MURDER MYSTERY - 4
    by Vismay
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    मातरे जी : में कुछ कहूं सर समीर :हां बोलों मेरे Sherlock मातरे जी : माहौल को थोडा हलका बनाते हुए कहां की सर खूनी ने तिवारी जी की उंगली काटकर.......... ...

    अब लौट चले - 6
    by Deepak Bundela Moulik
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    अब लौट चले -6अभिषेक का  हर शब्द में मेरे प्रति प्रतिशोध था... ये देखिये मेरे पिताजी और मेरी माँ... कितने खुश है एक नए जीवन की शुरुआत करने के लिए.. ...

    MURDER MYSTERY - 3
    by Vismay
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    सर तिवारी जी का किसी के साथ अफेयर था, दोनो उस दिन रोमांटिक मूड में रहे होंगे. तिवारी जी खुरशी से बंघे थे मतलब वो लोग कुछ नया और ...

    चलन
    by राजनारायण बोहरे
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                   कहानी--- राजनारायण बोहरे                                                                          चलन                                                                                    तुलसा खरे साहब के बंगले के लॉन की देखभाल करता है । आज भ

    अब लौट चले - 5
    by Deepak Bundela Moulik
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    यहाँ देख ऐसा लग रहा था... ये वही बेड जो आज भी बैसा ही हैं बेड पर बिछी ये चादर भी तो वही हैं... उफ़... ये में क्या देख ...

    MURDER MYSTERY - 2
    by Vismay
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    जैसे की किसका खून हुआ है? किसने किया है ? और न जाने क्या कया.. समीर मिडीया वालो को  समीर मीडिया वाले को टालता हुआ क्राइम सीन पर पहुंचा.वहां ...

    चहुँ और प्रेम
    by राज बोहरे
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    ⭕*|| सखी ||**० राजनारायण बोहरे*________________________रात में सोते हुए जागने की बीमारी है मुझे। बरसते पानी की ‘टप्प  टप्प‘ ध्वनि के बावजूद जब अहाते के बाहरी दरवाजे की कुण्डी खड़की,  ...

    सबेरे सबेरे
    by r k lal Verified icon
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    सबेरे सबेरेआर 0 के 0 लालसंजीव अपने बॉस के कमरे से निकल कर कार्यालय के हाल में आया तो उसने सबको बताया कि आज बॉस का मूड बहुत खराब ...

    अब लौट चले - 4
    by Deepak Bundela Moulik
    • (3)
    • 104

    अब लौट चले -4तभी बस का हॉर्न बजा तो मेरी तन्द्रता भंग हुई... लोग बस में बैठने लगे थे... और बस धीरे -धीरे रेंगने लगी थी.. मन असमंजस में ...

    MURDER MYSTERY - 1
    by Vismay
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    • 283

    " लगातार बज रहीं टेलीफोन की घंटी की वजह से हवलदार मातरे की नींद खुल गई."                           ...

    मैडम का मन जीत लिया
    by Monty Khandelwal
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    3 दिन पहले की ही बात है | मुझे  मारवाड़ जाना है| जिसकी टिकट निकलने के लिए में  रेलवे स्टेशन गया था | जहाँ पे  रिजर्वेशन टिकट मिलती है ...

    अब लौट चले - 3
    by Deepak Bundela Moulik
    • (7)
    • 170

    अब लौट चले -3शायद रवि को मनु की बात का बुरा लगा था... मै उसके पीछे पीछे जानें लगी थी.. रवि... रवि... आप तो बुरा मान गये...?और मै झट से ...

    बाँझ
    by Mirza Hafiz Baig
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    • 955

    बांझ1.शाम. . .खिड़की से बाहर देखते हुए, अपनी आत्मा के दर्द को महसूस करना जैसे उसके जीवन का ढर्रा बन गया था। शाम, रात में बदलने लगी थी। उसने ...

    अब लौट चले - 1
    by Deepak Bundela Moulik
    • (8)
    • 207

    अब लौट चले आज मुझें ऐसा लग रहा था कि मै सच में आज़ाद हूं, सारी दुनियां आज पहली बार मुझें नई लग रहीं थी, सब कुछ नया और सुकून ...

    अम्मा
    by Ila Singh
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    अम्मा  *******   “आज हमसे खाना नही बनेगा भाई !”भाभी ने रोटी सेकते-सेकते झटके से आटे की परात अपने आगे से सरका दी और झल्लाते हुए लकड़ी के पटरे को पैर से ...

    हीरो
    by Saurabh kumar Thakur
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    • 204

    बात है,बिहार के एक ऐसे जिला जहाँ नक्सली हमले होते रहते हैं,और ज्यादा नक्सली वहीं होते हैं । उस जिले में बारह दोस्त रहते थे,पहले का नाम सौरभ,दूसरे का ...

    इन्कार
    by Mukteshwar Prasad Singh
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                        इन्कार​आज राजा देवकीनन्दन एण्ड डायमंड जुबली महाविद्यालय ,मुंगेर के कैम्पस में नयी चहल-पहल थी। ऐसी चहल पहल प्रायः प्रतिवर्ष ...

    दास्तान-ए-अश्क - 30 - लास्ट पार्ट
    by SABIRKHAN Verified icon
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    कहते हैं ना मजबूरी इंसान को बहुत कुछ करवाती है जिंदगी में पहली बार उसने अपने भाइयों से मदद मांगी.. मरने से तो यह रास्ता उचित ही था l ...

    गांव की पंडिताइन
    by r k lal Verified icon
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    "गांव की पंडिताइन" आर0 के0 लाल     विजयदशमी के अवसर पर पंडिताइन ने अपने घर में भंडारा किया। कई गांवों के लोगों को निमंत्रण दिया था। बड़ी संख्या ...

    मेरा गाँव मेरा देश
    by Mukteshwar Prasad Singh
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                     मेरा गाँव मेरा देश​नैनसी कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से ’एम फील’ की परीक्षा उत्तीर्ण कर गयी। उसका शोध का विषय था ’’इण्डियन कल्चर ...

    एक और मौत
    by Deepak Bundela Moulik
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    रुपहले पर्दे के पीछे का सच मैने मेकअप रूम के दरवाजे को नॉक किया था, कि तभी अंदर से लीना मेम की आवाज़ आई.... कौन हैं....? मेम मै सुमित.... ...

    दास्तान-ए-अश्क - 29
    by SABIRKHAN Verified icon
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    मेम साहब कलयुग के इस काले दौर में लोग इतने स्वार्थी हो गए हैं कि अपने खून के रिश्तो का भी लिहाज नहीं करते जान लेने की नौबत आये ...

    अतीत
    by Mukteshwar Prasad Singh
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                          अतीतलगभग एक घंटा से स्थापना समिति की बैठक समाहर्ता कक्ष में चल रही थी।ज़िला के आला अधिकारी इसमें ...

    रिश्ता अपनो से
    by Manjeet Singh Gauhar
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    आपने अब तक शायद सिर्फ़ ऐसे लोगों को ही देखा होगा जो ये कहते हैं कि ' मेरे परिवार में तो चार सदस्य हैं या पाँच सदस्य हैं या ...

    दास्तान-ए-अश्क - 28
    by SABIRKHAN Verified icon
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    "बस करो रज्जो अब मुझसे और नहीं भागा जा रहा!" पसीने से भीगे कपडों में उसे घबराहट हुई तो वो बोल उठी! -कुछ देर कहीं बैठ जाते हैं!' "नहीं ...