हिंदी क्लासिक कहानियां किताबें और कहानियां मुफ्त पीडीएफ

    अम्मा
    by Ila Singh
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    अम्मा  *******   “आज हमसे खाना नही बनेगा भाई !”भाभी ने रोटी सेकते-सेकते झटके से आटे की परात अपने आगे से सरका दी और झल्लाते हुए लकड़ी के पटरे को पैर से ...

    हीरो
    by Saurabh kumar Thakur
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    बात है,बिहार के एक ऐसे जिला जहाँ नक्सली हमले होते रहते हैं,और ज्यादा नक्सली वहीं होते हैं । उस जिले में बारह दोस्त रहते थे,पहले का नाम सौरभ,दूसरे का ...

    इन्कार
    by Mukteshwar Prasad Singh
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                        इन्कार​आज राजा देवकीनन्दन एण्ड डायमंड जुबली महाविद्यालय ,मुंगेर के कैम्पस में नयी चहल-पहल थी। ऐसी चहल पहल प्रायः प्रतिवर्ष ...

    दास्तान-ए-अश्क - 30 - लास्ट पार्ट
    by SABIRKHAN
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    कहते हैं ना मजबूरी इंसान को बहुत कुछ करवाती है जिंदगी में पहली बार उसने अपने भाइयों से मदद मांगी.. मरने से तो यह रास्ता उचित ही था l ...

    गांव की पंडिताइन
    by r k lal
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    "गांव की पंडिताइन" आर0 के0 लाल     विजयदशमी के अवसर पर पंडिताइन ने अपने घर में भंडारा किया। कई गांवों के लोगों को निमंत्रण दिया था। बड़ी संख्या ...

    मेरा गाँव मेरा देश
    by Mukteshwar Prasad Singh
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                     मेरा गाँव मेरा देश​नैनसी कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से ’एम फील’ की परीक्षा उत्तीर्ण कर गयी। उसका शोध का विषय था ’’इण्डियन कल्चर ...

    एक और मौत
    by Deepak Bundela Moulik
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    रुपहले पर्दे के पीछे का सच मैने मेकअप रूम के दरवाजे को नॉक किया था, कि तभी अंदर से लीना मेम की आवाज़ आई.... कौन हैं....? मेम मै सुमित.... ...

    दास्तान-ए-अश्क - 29
    by SABIRKHAN
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    मेम साहब कलयुग के इस काले दौर में लोग इतने स्वार्थी हो गए हैं कि अपने खून के रिश्तो का भी लिहाज नहीं करते जान लेने की नौबत आये ...

    अतीत
    by Mukteshwar Prasad Singh
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                          अतीतलगभग एक घंटा से स्थापना समिति की बैठक समाहर्ता कक्ष में चल रही थी।ज़िला के आला अधिकारी इसमें ...

    रिश्ता अपनो से
    by Manjeet Singh Gauhar
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    आपने अब तक शायद सिर्फ़ ऐसे लोगों को ही देखा होगा जो ये कहते हैं कि ' मेरे परिवार में तो चार सदस्य हैं या पाँच सदस्य हैं या ...

    दास्तान-ए-अश्क - 28
    by SABIRKHAN
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    "बस करो रज्जो अब मुझसे और नहीं भागा जा रहा!" पसीने से भीगे कपडों में उसे घबराहट हुई तो वो बोल उठी! -कुछ देर कहीं बैठ जाते हैं!' "नहीं ...

    अनुराग
    by Mukteshwar Prasad Singh
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                            अनुरागचारों ओर कितने परिवर्तन हो चुके थे। हों भी क्यों नही पूरा एक दशक जो बीत गया ...

    घौंसला
    by Bhupendra Dongriyal
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                                    "घौंसला" आज मन उदास है। मैं ही नहीं श्रीमती जी दोनों बेटियाँ और ...

    टूटी चप्पल
    by Manjeet Singh Gauhar
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    बहुत समय पहले की बात है। जबकि तब हमारे देश में मुग़ल बादशाह शाहजँहा का शासन हुआ करता था।उस समय हमारे देश हिन्दूस्तान में कुछ विदेशी लोग घूमने आएे ...

    दास्तान-ए-अश्क - 27
    by SABIRKHAN
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    "मुझे मेरी उम्मीद से ज्यादा मिला अय जिंदगी अब कभी मुस्कुराने की गुस्ताखी नहीं करनी मुझे..? "मैडम जी आप कहां हो..?" रज्जो की आवाज सुनकर उसका दिल उछल पड़ा! ...

    पलायन
    by Mukteshwar Prasad Singh
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                      " पलायन "​गंगा दियारा के गाँव रामपुर में आग लग गयी थी। कुछ ही देर में गाँव के कई घरों ...

    दास्तान-ए-अश्क - 26
    by SABIRKHAN
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    • 253

    मेरे सभी प्यारे दोस्तों.. अश्क' काफी लेट हुई है! उसके लिए क्षमा चाहता हूं कुछ तो मजबूरियां रही है मेरी जानता हूं कि आप सब मुझे समझेंगे! इस कहानी ...

    गुलाबो
    by Mukteshwar Prasad Singh
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                    " गुलाबो ’’साहेबपुर कमाल स्टेशन के पश्चिमी छोर पर चालीस -पचास बनजारे कुछ दिनों से अपने तम्बुओं को तान डेरा जमाए ...

    शरद पूर्णिमा
    by Pushp Saini
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    कहानी~~शरदपूर्णिमा✒¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤शाम का सुहाना मौसम बाग़ के सौन्दर्य को बढ़ा रहा था,तो दूसरी तरफ कृत्रिम झरनों से फूटती कलकल की ध्वनि के साथ-साथ पक्षियों की चह चहाहट वातावरण को सुमधुर ...

    दास्तान-ए-अश्क - 25
    by SABIRKHAN
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    श्याम ढल रही थी!  एक बेजान श्याम..! जो सुब्हा का उजाला लेकर आने का वादा करके जाती है..!  मगर किसको सुब्हा की पहली किरन नसिब थी ये कोई नही जानता ...

    रीति रिवाज को अनुकूल बनाएं
    by r k lal
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    रीति रिवाज को अनुकूल बनाएं आर 0 के 0 लाल   तुम यहां सोई हुई हो। तुम्हें पता भी नहीं  कि मेहमान चले गए हैं। तुम बड़ी हो गई ...

    दास्तान-ए-अश्क - 24
    by SABIRKHAN
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    किसी ने मुझे एक बहुत अच्छी बात बताई!"एक औरत  वो होती है ,जिसके किचन में खाना बनाने के लिए बहोत सारे व्यंजन- मसाले मौजूद होते हैं! उसके प्रयोग से ...

    घर का माहौल
    by r k lal
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    “घर का माहौल”                        आर 0 के 0 लाल   हेलो सविता! कैसी हो? हम लोग सोच रहे हैं कि शुक्रवार को तुम्हारे यहां आ जाएं। बहुत दिन से ...

    सुनहरे हथियार
    by Manjeet Singh Gauhar
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    कुछ समय से प्रचलित हमारे भारत देश में एक बात बहुत ही ज़्यादा प्रसिद्ध है। और वो ये कि ' अपनी और अपने सामान की रक्षा स्वयं करें '।अब ...

    असीम प्रतीक्षा
    by Pushp Saini
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    कहानी --- असीम प्रतीक्षा ✍?***********************"तुमने पार्क में मिलने को क्यों बुलाया ? घर ही आ जाती न" --- असीम ने कहा प्रतीक्षा ने इस बात पर कुछ नहीं कहा और ...

    दास्तान-ए-अश्क - 23
    by SABIRKHAN
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    मौत ही इंसान की दुश्मन नहीं ज़िंदगी भी जान लेकर जाएगी - 'जोश' मलासियानी ...................  .... बहुत ही अजीब बात थी उसको धिन्न हो उठी थी पुरुष जात से..! ...

    असली आज़ादी वाली आज़ादी
    by devendra kushwaha
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    देश को आज़ाद कराना आसान नही था बहुत त्याग और संघर्ष के बाद इस देश को आज़ादी नसीब हुई। आजादी बेशकीमती थी क्योंकि लाखों लोगों ने इसे पाने के ...

    लल्लू
    by Pushp Saini
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    ( कहानी -- लल्लू ✍)__________________"बेटा हुआ है" नर्स ने जैसे ही यह ख़बर दी तो अम्मा चहक उठी और बोली --"अरे लल्लू तू बाप बन गया,छोटा लल्लू आया है" ...

    दास्तान-ए-अश्क - 22
    by SABIRKHAN
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    एक औरत जब कोई भी बात मन में ठान लेती है ,तो कहते हैं भगवान भी उसे उसकी जगह से हिला नहीं सकते!उसने मन ही मन फैसला कर ही ...

    दूर देश में मेरा दोस्त
    by Manjeet Singh Gauhar
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    एक बात तो है भाइयों अपना देश अपना होता है।इस विषय में मैं आपको एक कहानी सुनाता हूँ-:मेरा एक बहुत प्यारा दोस्त था। जिसका नाम शिवम् था। लेकिन मैं ...