"आइना सच नहीं बोलता" कहानी में, घर में छोटी-छोटी खुशियाँ और दिवित की किलकारियाँ सकारात्मकता का माहौल बना रही हैं। दिवित अपने खिलौनों के प्रति उत्सुक है और चिराग द्वारा दी गई नई कारों का सेट पाकर खुशी से दौड़ता है। चाय और पकोड़ों के बीच, चिराग के ऑफिस के किस्से सुनते हुए सभी हंसते हैं, और नंदिनी चिराग की पत्नी को भाग्यशाली मानती है। अमिता दिवित को सुलाने ले जाती है, जिससे उसे अपने बेटे दीपक के स्कूल के पहले दिन की याद आती है। नंदिनी भी काम में व्यस्त है और नए कपड़ों के डिज़ाइन के बारे में सोच रही है, साथ ही उसने कसबे की लड़कियों को ट्रेनिंग के लिए दिल्ली भेजने का निर्णय लिया है। चिराग की अनुपस्थिति से सभी चिंतित हैं, और नंदिनी उसकी सरप्राइज की बात सोचती है। गर्मी की दोपहर में, जब चिराग एक अजनबी के साथ घर के बाहर आता है, नंदिनी अपनी चिंता को छिपाते हुए तैयार होती है। कहानी में पारिवारिक जीवन, रिश्तों और मेहनत की झलक देखने को मिलती है। आइना सच नही बोलता - भाग ३० Neelima Sharma द्वारा हिंदी फिक्शन कहानी 48.3k 4.3k Downloads 14.1k Views Writen by Neelima Sharma Category फिक्शन कहानी पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण तीसरी बारी घंटी बजने पर नंदिनी ने फ़ोन उठाया और साक्षी ने उसे संबोधित करते हुए मजाकिया लहजे में कहा “ नंदिनी जी ! क्या आप जानती हैं आप को एक प्यारा सा समाचार मिलने वाला हैं जिसके लिए आप हमसे नेग भी मांग सकती हैं “ “क्या हुआ भाभी पहेलियाँ ना बुझाओ.. क्या अमर भैया को नया ठेका मिल गया या उन्होंने अपनी मनपसंद सूमो खरीद ली “ व्यस्त नंदिनी ने थोड़ी रुखी आवाज़ में भाभी से कहा लेकिन आज तो भाभी बहुत अच्छे मूड में थी “नही !!आप बूझिये तो ननद रानी ! अगर आपने सही बूझ लिया तो आपको सोने के कंगन मिलेंगे “ अब नंदिनी भी सोच में पड़ गयी ऐसा क्या हुआ होगा जो इतना महँगा तोहफा ......उसे अचानक याद आया जब भतीजा आर्यवीर जन्मा था वो अविवाहित थी तब उसे भैया ने सोने की अँगूठी नेग में दिलाई थी उसने जब जडाऊ कंगन दिलाने को कहा था तो अमर भैया के साथ माँ और पिता जी ने यह कहकर चुप करा दिया था कि दूसरें भतीजे के होने पर कंगन दिलाएंगे तब तक सम्हालने लायक तो जाओ इतने बड़े गहने …. “तो क्या मैं बुआ बनने वाली हूँ फिर से !!!” Novels आइना सच नहीं बोलता “रिश्ते सीमेंट और ईंटों की मज़बूत दीवारों में क़ैद हो कर नहीं पनपते... उन्हें जीने के लिये खुली बाहों का आकाश चाहिये। क्या विवाह हो जाना ही एक स्त्री... More Likes This त्रिवेणी: एक आदर्श बहू से बेकार बहू बनने तक का सफर - 1 द्वारा Triveni chakrdhari अनाथ - अध्याय 1 द्वारा Dev Kumar Rawat गायब - एक रात की कहानी - 1 द्वारा Patel Lay Starseeds - Part 1 द्वारा vyomatara Oyy Mr. Vampire - 1 द्वारा kusum kumari बारह बरश का इंतज़ार - 2 द्वारा kusum kumari Second Chance - 1 द्वारा wang pang अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी