अध्याय 3 "झूठे मददगार" में बाबू अमृतराय अपनी नई देशभक्ति की उमंगों के साथ रातभर करवटें बदलते हैं। सुबह वे अपने दोस्तों से मिलने निकलते हैं, पहले वकील मिस्टर गुलजारीलाल के पास जाते हैं। वकील उनके इरादों को सुनकर बहुत खुश होते हैं और उनकी मदद करने का आश्वासन देते हैं। इसके बाद अमृतराय अपने सच्चे दोस्त दाननाथ के पास जाते हैं, लेकिन दाननाथ सार्वजनिक रूप से मदद करने के लिए हिचकिचाते हैं। वे अमृतराय को छिपे-छिपे मदद करने का वादा करते हैं, क्योंकि उन्हें अपनी प्रतिष्ठा की चिंता है। अमृतराय को पंडित जी से भी अधिक उम्मीद नहीं थी, लेकिन पंडित जी उनकी योजनाओं में रुचि दिखाते हैं और खुलकर सहयोग करने का आश्वासन देते हैं। इस बातचीत से अमृतराय का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे अपने काम को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित होते हैं। प्रेमा - 3 Munshi Premchand द्वारा हिंदी फिक्शन कहानी 11.3k 6.4k Downloads 15.4k Views Writen by Munshi Premchand Category फिक्शन कहानी पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण प्रेमा प्रेमचंद का पहला उपन्यास था जो १९०७ में हिन्दी में प्रकाशित हुआ था। अध्याय 3 विषयसार - जूठे मददगार Novels प्रेमा संध्या का समय हैए डूबने वाले सूर्य की सुनहरी किरणें रंगीन शीशो की आड़ सेए एक अंग्रेजी ढ़ंग पर सजे हुए कमरे में झॉँक रही हैं जिससे सारा कमरा रंगीन हो रहा... More Likes This उजाले की राह द्वारा Mayank Bhatnagar Operation Mirror - 3 द्वारा bhagwat singh naruka DARK RVENGE OF BODYGARD - 1 द्वारा Anipayadav वाह साहब ! - 1 द्वारा Yogesh patil मेनका - भाग 1 द्वारा Raj Phulware बेवफाई की सजा - 1 द्वारा S Sinha RAJA KI AATMA - 1 द्वारा NOMAN अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी